सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध: संसद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
राष्ट्रपति मुर्मू ने संसद में कहा कि सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है, करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए हैं और सामाजिक सुरक्षा व राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिली है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार (28 जनवरी, 2026) को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार देश में सच्चे सामाजिक न्याय के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार के तीसरे कार्यकाल में गरीबों को और अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और आज लगभग 95 करोड़ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा के लाभ मिल रहे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले दस वर्षों में लगभग 25 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जो सरकार की नीतियों और योजनाओं की प्रभावशीलता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भ्रष्टाचार और घोटालों पर लगाम लगाने में सफल रही है तथा सार्वजनिक धन के सही उपयोग को सुनिश्चित किया गया है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि 21वीं सदी के पहले 25 वर्षों का समापन भारत के लिए उपलब्धियों और गर्व के क्षणों से भरा रहा है। बीते 10–11 वर्षों में देश ने हर क्षेत्र में अपनी नींव को मजबूत किया है, जिससे ‘विकसित भारत’ की दिशा में यात्रा तेज हुई है।
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उन्होंने नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस और महान आदिवासी नेता व स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के राष्ट्रीय स्तर पर हुए आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्वजों के योगदान को याद करने से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। सरदार वल्लभभाई पटेल और भारत रत्न भूपेन हजारिका की जयंती समारोहों ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और सशक्त किया।
राष्ट्रपति ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने अपने संसाधनों के बल पर आतंक के ठिकानों को नष्ट कर देश की शक्ति और साहस का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी आतंकी कार्रवाई का जवाब दृढ़ और निर्णायक रूप से दिया जाएगा। राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ पर भी कार्य किया जा रहा है।
अपने भाषण में राष्ट्रपति ने ‘विकसित भारत—रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G योजना का उल्लेख किया, जिस पर विपक्ष ने विरोध दर्ज कराया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देगी, भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकेगी तथा ग्रामीण विकास को नई गति देगी। विपक्ष ने इस कानून को वापस लेने की मांग की, जबकि सरकार ने दावा किया कि यह ग्रामीण रोजगार की गारंटी को और मजबूत करेगा।
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