राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सिद्धगंगा मठ दौरा: इस यात्रा का महत्व और मठ की विशेषता
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सिद्धगंगा मठ के 119वीं जयंती समारोह में भाग लेंगी। सिद्धगंगा मठ सेवा, शिक्षा और समानता का प्रतीक है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों के जीवन को आकार देता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज 1 अप्रैल को कर्नाटक के तुमकुरु स्थित सिद्धगंगा मठ का दौरा करेंगी, जहां वह शिवकुमार स्वामीजी की 119वीं जयंती समारोह में भाग लेंगी। स्वामीजी का निधन 21 जनवरी 2019 को 111 वर्ष की आयु में हुआ था।
मठ के प्रमुख सिद्धलिंग स्वामीजी के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू पहले मठ के गड्डूगे (स्मारक) पर जाएंगी और वहां पूजन करेंगी, इसके बाद वह मुख्य मंच पर औपचारिक कार्यक्रम में शामिल होंगी। यह कार्यक्रम 11 बजे से 12 बजे तक चलेगा, और इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे, जिनमें वीणा वादन और 119 महिलाओं द्वारा वचन गान शामिल होंगे। इस दौरान दसोहा (सामुदायिक भोजन) की व्यवस्था भी की जाएगी, जैसा कि पिछले वर्षों में होता रहा है।
सिद्धगंगा मठ की स्थापना 15वीं सदी में गोसला सिद्धेश्वर स्वामीजी द्वारा की गई थी, और यह मठ 600 साल पुराना एक प्रमुख आध्यात्मिक और शैक्षिक संस्थान है। मठ को विशेष रूप से "महा दसोहा क्षेत्र" के रूप में जाना जाता है, जहां समाज के सभी वर्गों को मुफ्त भोजन, शिक्षा और आश्रय प्रदान किया जाता है। यह मठ 10,000 से अधिक बच्चों को मुफ्त शिक्षा, भोजन और आवास देता है।
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मठ सिद्धगंगा शिक्षा समाज के तहत कर्नाटक में 128 शैक्षिक संस्थान चला रहा है और दृष्टिहीन बच्चों के लिए विशेष विद्यालय भी संचालित करता है। इसके अतिरिक्त, मठ किसानों के लिए कृषि और औद्योगिक प्रदर्शनियों का आयोजन भी करता है।
राष्ट्रपति की यह यात्रा मठ के राष्ट्रीय महत्व को दर्शाती है, जो न केवल एक आध्यात्मिक केंद्र है, बल्कि सेवा, शिक्षा और समानता का प्रतीक भी है।
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