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पृथ्वीराज चव्हाण के बड़े राजनीतिक खुलासे, बोले- 2013 में कांग्रेस में आना चाहते थे गोपीनाथ मुंडे

पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने गोपीनाथ मुंडे, एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस को लेकर कई दावे किए। उन्होंने नीट, वंदे मातरम्, ‘दिमागी नक्सल’ और एसआईआर पर भी बयान दिया।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर बड़े दावे किए हैं। उन्होंने दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे के 2013 में कांग्रेस में शामिल होने की कथित कोशिश, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ हुई मुलाकात और देवेंद्र फडणवीस की केंद्र में संभावित भूमिका को लेकर अपनी बात रखी।

2013 में कांग्रेस में आना चाहते थे मुंडे?

चव्हाण ने दावा किया कि 2013 में गोपीनाथ मुंडे भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने पर विचार कर रहे थे। उनके मुताबिक, 18 अक्टूबर 2013 के आसपास मुंडे ने उनसे मुलाकात की थी। इसके बाद चव्हाण ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी और उनका कहना है कि वह भी मुंडे को कांग्रेस में लाने के लिए तैयार थीं।

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हालांकि, मुंडे की कथित शर्त थी कि भाजपा छोड़ने से पहले उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया जाए। चव्हाण के अनुसार, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस शर्त के लिए तैयार नहीं हुए। उनका कहना था कि मुंडे पहले भाजपा छोड़ें, चुनाव लड़कर जीतें और उसके बाद मंत्री पद पर विचार किया जाए। इसी मतभेद के कारण यह राजनीतिक बदलाव आगे नहीं बढ़ सका।

एकनाथ शिंदे को लेकर भी दावा

चव्हाण ने बताया कि जब एकनाथ शिंदे विधायक थे, तब उन्होंने उनसे मुलाकात की थी। दोनों के बीच कुछ राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, चव्हाण ने बातचीत का पूरा विवरण बताने से इनकार किया। उन्होंने शिंदे को अपना मित्र बताते हुए कहा कि दोनों सतारा जिले से आते हैं।

नीट और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी का मुद्दा

चव्हाण ने नीट, टीईटी और हाईकोर्ट क्लर्क परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने जांच व्यवस्था मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

फडणवीस को केंद्र में जिम्मेदारी मिलने की चर्चा

फडणवीस के केंद्र में जाने की संभावनाओं पर चव्हाण ने कहा कि उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने का विरोध किया और नीट पेपर लीक विवाद का हवाला दिया।

चव्हाण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि समाज को जाति, धर्म और अन्य मुद्दों के आधार पर बांटने वाली राजनीति बंद होनी चाहिए।

इसके अलावा, उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की समयसीमा बढ़ाने की मांग की। चव्हाण ने दावा किया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में करीब 56 हजार दोहरे नाम दर्ज हैं, हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

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