कश्मीर और कारगिल में ईरान समर्थक रैलियां, नमाज़ के बाद सड़कों पर उतरे लोग
कश्मीर और लद्दाख के कारगिल में जुमे की नमाज़ के बाद ईरान समर्थक रैलियां निकाली गईं, जिनमें लोगों ने ईरानी शासन के समर्थन में और अमेरिका-इज़रायल के खिलाफ नारे लगाए।
कश्मीर घाटी और लद्दाख के कारगिल क्षेत्र में शुक्रवार (16 जनवरी, 2026) को जुमे की नमाज़ के बाद ईरान समर्थक रैलियों का आयोजन किया गया। इन रैलियों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और ईरानी शासन के प्रति एकजुटता व्यक्त की, जो इस समय देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाओं का सामना कर रहा है।
कश्मीर के बडगाम जिले में एक प्रमुख रैली आयोजित की गई, जहां नमाज़ के बाद उपासक इमामबाड़ा से मुख्य चौक तक मार्च करते हुए निकले। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ नारेबाजी की और ईरान के समर्थन में तख्तियां व बैनर उठाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ईरान पर बाहरी दबाव और हस्तक्षेप अनुचित है और वे ईरानी जनता के साथ खड़े हैं।
इसी तरह लद्दाख के कारगिल क्षेत्र में भी ईरान समर्थक प्रदर्शनों की खबरें सामने आईं। यहां भी नमाज़ के बाद लोग सड़कों पर जमा हुए और ईरान के समर्थन में नारे लगाए। आयोजकों ने कहा कि ये रैलियां शांतिपूर्ण थीं और इनका उद्देश्य केवल एकजुटता का संदेश देना था।
पिछले कुछ हफ्तों से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और आर्थिक संकट के चलते हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी ईरान को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी पृष्ठभूमि में कश्मीर और कारगिल में हुए ये प्रदर्शन वैश्विक घटनाओं की स्थानीय प्रतिक्रिया के रूप में देखे जा रहे हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, रैलियों के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे और कहीं से भी किसी तरह की हिंसा या अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। सुरक्षा बलों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
इन रैलियों से यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का प्रभाव स्थानीय राजनीति और सामाजिक गतिविधियों पर भी पड़ता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां वैश्विक मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को लेकर गहरी संवेदनशीलता पाई जाती है।
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