नीट पेपर लीक विवाद के बाद सरकार लाएगी सार्वजनिक परीक्षाएं संशोधन विधेयक 2026, 27 जुलाई को लोकसभा में होगा पेश
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार 27 जुलाई को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाएं संशोधन विधेयक 2026 पेश करेगी, जिसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को 27 जुलाई को लोकसभा में पेश करेगी। इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में नकल, पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए मौजूदा कानून को और मजबूत बनाना है।
लोकसभा के विधायी कार्यसूची के अनुसार, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सदन में यह विधेयक पेश करेंगे। यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन का प्रस्ताव रखता है। विधेयक पेश किए जाने के बाद डॉ. जितेंद्र सिंह इसे सदन में विचार और पारित करने का प्रस्ताव भी रखेंगे।
यह कदम कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले के बाद उठाया जा रहा है, जिसने देशभर में व्यापक छात्र विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया। छात्रों और विभिन्न संगठनों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, नकल रोकने के लिए सख्त कानून बनाने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी।
सरकार का मानना है कि प्रस्तावित संशोधन सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने और परीक्षा प्रक्रिया में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद करेंगे। हालांकि, विधेयक के विस्तृत प्रावधान सदन में पेश किए जाने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया। पार्टी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उसकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है और आगे आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग लगातार तेज होती रही है। ऐसे में संसद में पेश होने वाला यह संशोधन विधेयक शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें लोकसभा में इस विधेयक पर होने वाली चर्चा और उसके अंतिम स्वरूप पर टिकी हैं।