×
 

पब्लिक एग्जाम्स संशोधन विधेयक पर्याप्त नहीं, सीजेपी ने कहा- पेपर लीक रोकने के उपाय बताए सरकार

सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि पब्लिक एग्जाम्स संशोधन विधेयक पेपर लीक रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। सरकार को परीक्षा सुधारों पर ठोस कदम बताने चाहिए।

सीजेपी (कॉकरेच जनता पार्टी) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने गुरुवार को कहा कि पब्लिक एग्जाम्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

आशुतोष रांका ने कहा कि संसद में चर्चा के दौरान परीक्षा व्यवस्था की बुनियादी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा ढांचे को मजबूत करने, कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने, परीक्षा कार्यक्रम में सुधार करने, पाठ्यक्रम में बदलाव, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और एनटीए (राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी), एसएससी (कर्मचारी चयन आयोग) जैसी परीक्षा कराने वाली संस्थाओं में सुधार को लेकर कोई विस्तृत चर्चा नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में शामिल निजी विक्रेताओं और एजेंसियों की भूमिका पर भी बात नहीं की गई। रांका ने कहा कि जब तक पेपर लीक के पीछे मौजूद संरचनात्मक कमियों को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं जारी रहेंगी।

और पढ़ें: पेपर लीक रोकने वाला बिल पास, शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी बोले- खत्म होगा पेपर लीक का पूरा तंत्र

उन्होंने कहा, "चोट लगने के बाद मरहम लगाना अलग बात है, लेकिन असली सवाल यह है कि चोट लगने से पहले उसे रोकने के लिए क्या किया जा रहा है। यह विधेयक इस मुद्दे को संबोधित नहीं करता।"

रांका ने बताया कि सीजेपी ने सरकार को पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा है और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन सुझावों पर विचार के लिए चार सप्ताह का समय मांगा है।

छात्रों को परेशान करना बंद करे सरकार: अभिजीत दीपके

इस बीच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों को परेशान करना बंद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र आतंकवादी नहीं बल्कि देश का भविष्य हैं।

छत्रपति संभाजीनगर हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद दीपके ने कहा कि दिल्ली में सीजेपी के नेतृत्व में करीब एक महीने तक चला आंदोलन सफल रहा और छात्रों की मांगों को मजबूती मिली।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों के घरों पर पुलिस भेजकर उन्हें धमकाया जा रहा है। दीपके ने कहा कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ हुई कार्रवाई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी। उन्होंने सरकार से छात्रों के साथ उचित व्यवहार करने की अपील की।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार युवाओं की आवाज नहीं सुनेगी तो युवा लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव लाने में सक्षम हैं।

और पढ़ें: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share