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पुणे जहरीली शराब कांड: 13 पुलिस और आबकारी कर्मी निलंबित, जांच सीआईडी को सौंपी गई

पुणे जहरीली शराब कांड में 14 लोगों की मौत के बाद 13 पुलिस और आबकारी कर्मी निलंबित किए गए हैं। मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी गई है।

महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 13 पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। इस मामले की जांच अब अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) को सौंप दी गई है।

अब तक इस मामले में एक प्रमुख शराब तस्कर सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह दुखद घटना पुणे शहर और पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र में सामने आई, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।

पुणे पुलिस आयुक्तालय के आदेश के अनुसार, हडपसर पुलिस थाने से जुड़े वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय मोगले, सहायक पुलिस निरीक्षक हसीना सिकलगर और उपनिरीक्षक हसन मुलानी को कथित अवैध शराब कारोबार पर रोक लगाने में विफल रहने के आरोप में निलंबित किया गया है।

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इसके अलावा पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस के छह कर्मियों, जिनमें एक वरिष्ठ निरीक्षक, एक उपनिरीक्षक और चार कांस्टेबल शामिल हैं, को भी निलंबित किया गया है। आबकारी विभाग ने भी तीन निरीक्षकों, छह उपनिरीक्षकों और चार कर्मचारियों सहित कुल 13 कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है।

पुलिस के अनुसार, पिंपरी-चिंचवड़ के फुगेवाड़ी क्षेत्र में 10 लोगों की मौत हुई, जबकि पुणे के हडपसर स्थित पांढरे माला क्षेत्र में चार लोगों ने दम तोड़ दिया। वहीं, पांच अन्य लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि जहरीली शराब आपूर्ति से जुड़े पूरे नेटवर्क की पहचान कर ली गई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यशवंतराव चव्हाण स्मृति अस्पताल के डीन डॉ. राजेंद्र वाबले ने बताया कि पीड़ितों में सांस लेने में दिक्कत, चक्कर आना, मुंह से झाग निकलना और बेहोशी जैसे लक्षण देखे गए थे।

इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार और उनके समर्थकों ने हडपसर क्षेत्र में कथित अवैध शराब अड्डे को ध्वस्त कर दिया। रोहित पवार ने इस घटना को बेहद भयावह बताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

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