पंजाब विधानसभा के विशेष सत्रों पर विपक्ष का हमला, कहा– अपने क्षेत्रों के मुद्दे उठाने का नहीं मिल रहा मौका
पंजाब में AAP सरकार के विशेष विधानसभा सत्रों पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। नेताओं का कहना है कि इन सत्रों में केंद्र विरोध तो होता है, लेकिन स्थानीय मुद्दे उठाने का मौका नहीं मिलता।
पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा बार-बार बुलाए जा रहे विधानसभा के विशेष सत्र विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। विपक्षी विधायकों का कहना है कि इन एकदिवसीय विशेष सत्रों में उनके विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े अहम मुद्दों को उठाने का मौका नहीं मिल पा रहा है। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने नियमित विधानसभा सत्रों को दरकिनार कर विशेष सत्र बुलाने की जरूरत पर सवाल उठाए हैं।
AAP सरकार ने 2022 में सत्ता में आने के बाद से अब तक पांच विशेष सत्र आयोजित किए हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य भाजपा-नीत केंद्र सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना करना रहा है। 30 दिसंबर को आयोजित पांचवें विशेष सत्र में विधानसभा ने केंद्र की ‘विकसित भारत–G Ram G योजना’ के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया, जिसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर करने वाला बताया गया।
इससे पहले जून 2022 में पहले विशेष सत्र में विश्वास प्रस्ताव लाया गया था, जब AAP ने आरोप लगाया कि भाजपा ने ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश की। इसके बाद भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड द्वारा हरियाणा को पानी छोड़े जाने, बाढ़ से हुए नुकसान और केंद्र की कथित लापरवाही जैसे मुद्दों पर भी विशेष सत्र बुलाए गए। नवंबर 2025 में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर आनंदपुर साहिब में विशेष सत्र आयोजित किया गया, जो राज्य के इतिहास में पहली बार हुआ।
30 दिसंबर के सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ‘विकसित भारत–G Ram G अधिनियम’ को दलित और गरीब विरोधी बताया। कांग्रेस और अकाली दल ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि भाजपा ने इसे भ्रष्टाचार से ध्यान हटाने की कोशिश बताया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार विशेष सत्रों पर पैसा बर्बाद कर रही है और नियमित सत्र नहीं बुला रही, जबकि मुख्यमंत्री मान ने इन आरोपों को गरीबों और दलितों के अधिकारों के खिलाफ बताया।
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