पंजाब विधानसभा: कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग वाली प्रस्ताव पारित, भगत सिंह पर विपक्ष का प्रस्ताव नहीं उठा
पंजाब विधानसभा ने कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया, जबकि कांग्रेस द्वारा भगत सिंह को भारत रत्न देने का प्रस्ताव उठाया नहीं गया।
पंजाब की विधानसभा ने सोमवार को बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने यह प्रस्ताव पेश करते हुए केंद्र सरकार से आग्रह किया कि दिवंगत कांशीराम को उनके योगदान के सम्मान में भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। यह प्रस्ताव उनकी 92वीं जयंती के एक दिन बाद आया है।
वित्त मंत्री चीमा के प्रस्ताव को सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया, और यह बजट सत्र के समापन दिन पारित हुआ। प्रस्ताव में कांशीराम के सामाजिक और राजनीतिक योगदान को मान्यता देने का उल्लेख किया गया।
वहीं, स्पीकर कुलतर सिंह संधवान ने विपक्षी कांग्रेस द्वारा पेश किए गए स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह को भारत रत्न देने के प्रस्ताव को विधानसभा में नहीं उठाने का निर्णय लिया। कांग्रेस का यह प्रस्ताव देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए भगत सिंह के योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से था।
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राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटना सत्र के दौरान विधानसभा में दलगत समीकरण और राजनीतिक रणनीति को दर्शाती है। कांग्रेस ने कांशीराम और भगत सिंह दोनों के नामों को महत्व देने का प्रयास किया, लेकिन केवल कांशीराम का प्रस्ताव पारित किया गया।
यह कदम बहुजन समाज के नेताओं और समर्थकों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि कांशीराम के सामाजिक और राजनीतिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है।
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