पंजाब कैबिनेट का बड़ा फैसला: ठेका प्रथा खत्म, 65,000 कर्मचारियों को मिलेगा स्थायी दर्जा
पंजाब कैबिनेट ने ठेका प्रथा खत्म कर 65,000 संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का फैसला लिया। इस कदम को रोजगार नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
श्रम कल्याण और कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए पंजाब कैबिनेट ने शनिवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया। राज्य सरकार ने ठेका प्रथा (कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम) को समाप्त करने और 65,000 से अधिक संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने को मंजूरी दे दी है।
इस फैसले को राज्य में रोजगार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, जिसका सीधा लाभ वर्षों से अस्थायी रूप से काम कर रहे कर्मचारियों को मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों को सुरक्षा, स्थायित्व और बेहतर भविष्य की गारंटी देगा।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार ने कहा कि लंबे समय से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारी समान काम करने के बावजूद स्थायी लाभों से वंचित थे, जिसे अब खत्म किया जा रहा है।
इस निर्णय के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, नगर निकायों, जल आपूर्ति और अन्य विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से नियमित किया जाएगा। इससे राज्य के प्रशासनिक ढांचे में भी स्थिरता आने की उम्मीद है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे “जनहित और कर्मचारियों के सम्मान की दिशा में बड़ा कदम” बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नियमितीकरण की प्रक्रिया के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जल्द जारी किए जाएंगे और सभी पात्र कर्मचारियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस फैसले से न केवल कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
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