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पंजाब कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी कलह, चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वड़िंग गुट आमने-सामने

पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद गहराता जा रहा है। भूपेश बघेल की सुलह कोशिशें फिलहाल सफल नहीं रहीं, जबकि चन्नी और राजा वड़िंग गुट आमने-सामने डटे हुए हैं।

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की अंदरूनी कलह और तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के खिलाफ चुनावी रणनीति पर ध्यान देने के बजाय पार्टी का पंजाब संगठन नेतृत्व विवाद में उलझा हुआ दिखाई दे रहा है। मौजूदा स्थिति में पंजाब कांग्रेस दो खेमों में बंटी नजर आ रही है। एक गुट पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में है, जबकि दूसरा पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के साथ खड़ा है।

पार्टी में बढ़ते विवाद को सुलझाने के लिए पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने नाराज नेताओं के साथ बैठक की। हालांकि, करीब दो घंटे चली इस बैठक में कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। बताया जा रहा है कि असंतुष्ट नेताओं ने अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई।

बैठक में शामिल कई वरिष्ठ नेताओं ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाने की मांग दोहराई। साथ ही उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की वकालत की।

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इस बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी मौजूद रहे, जो असंतुष्ट गुट के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, असंतुष्ट गुट में तीन सांसद और नौ विधायक शामिल हैं। इन नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि वे राजा वड़िंग के नेतृत्व में काम करने के लिए तैयार नहीं हैं।

बैठक के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पंजाब का नेतृत्व किसी "समझौता करने वाले नेता" के हाथों में नहीं होना चाहिए। उनके इस बयान से पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेद और अविश्वास की स्थिति साफ दिखाई दी।

वहीं, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने रंधावा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है। वड़िंग ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेता भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि उनके और रंधावा के बीच के मतभेद जल्द सुलझ जाएंगे।

इस बीच भूपेश बघेल ने दोनों गुटों को भरोसा दिलाया है कि विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन केवल उनकी जीत की संभावना के आधार पर किया जाएगा और किसी भी गुट की अनदेखी नहीं होगी। बघेल जल्द ही पूरे घटनाक्रम की जानकारी कांग्रेस हाईकमान को देंगे, जिसके बाद पंजाब कांग्रेस के नेतृत्व संकट पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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