कोई देशविरोधी गतिविधि नहीं : पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खालिस्तानी संबंधों के आरोप में सात साल से हिरासत में बंद व्यक्ति को जमानत दी
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सात साल से हिरासत में बंद व्यक्ति सुक़मंदर सिंह को खालिस्तानी पोस्टर मामले में जमानत दी, शर्त में कहा गया कि वह कोई देशविरोधी गतिविधि नहीं करेगा।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में सात साल, दो महीने और 22 दिन से हिरासत में बंद व्यक्ति सुक़मंदर सिंह को जमानत दी। वह आरोपित था कि उसने खालिस्तानी गतिविधियों के तहत “खालिस्तान जिंदाबाद” और “खालिस्तान रेफरेंडम 2020” वाले पोस्टर और बैनर चिपकाए थे।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनूप चितकारा और न्यायमूर्ति सुखविंदर कौर ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए पाया कि इस अवधि की हिरासत बहुत लंबी है, खासकर तब जब आरोप के तहत केवल डिजिटल डेटा बरामद हुआ था, न कि भौतिक हथियार। कोर्ट ने इसे पूर्व-ट्रायल अवधि के लिए “अत्यधिक” माना।
जमानत की शर्तों में अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्त नहीं होना है और उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी को अपने व्यवहार में कानून का पालन करना होगा और किसी भी तरह की हिंसा या देशविरोधी गतिविधियों से दूर रहना होगा।
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सुक़मंदर सिंह पर यह आरोप था कि वह खालिस्तानी समर्थक पोस्टर और बैनर के माध्यम से विभाजनकारी और देशविरोधी संदेश फैलाने का प्रयास कर रहा था। हालांकि, अदालत ने उसकी हिरासत को अत्यधिक बताते हुए, न्यायसंगत जमानत की अनुमति दी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला लंबित पूर्व-ट्रायल हिरासत और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इससे यह संदेश भी जाता है कि न्यायपालिका व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है।
इस जमानत से आरोपी सुक़मंदर सिंह अब शर्तों का पालन करते हुए अपनी आज़ादी में रह सकता है, जबकि मामले की न्यायिक प्रक्रिया अभी भी जारी रहेगी।