लोकतंत्र पर धब्बा : संसद में हंगामे के बाद राहुल गांधी ने स्पीकर को लिखा पत्र
संसद में बोलने से रोके जाने पर राहुल गांधी ने स्पीकर को पत्र लिखकर इसे लोकतंत्र पर धब्बा बताया और आरोप लगाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में हुए हंगामे के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उन्हें जानबूझकर बोलने से रोका गया। उन्होंने इस घटना को “लोकतंत्र पर धब्बा” करार दिया है और कहा है कि इससे यह गंभीर आशंका पैदा होती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा, “आज लोकसभा में मुझे बोलने से रोकना इस बात की ओर इशारा करता है कि एक सुनियोजित प्रयास के तहत मुझे, विपक्ष के नेता के रूप में, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने से वंचित किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा एक प्रमुख विषय था, जिस पर संसद में चर्चा होना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि उन्हें लगातार दूसरे दिन पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक से अंश पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। जिन अंशों का वे उल्लेख करना चाहते थे, उनमें वर्ष 2020 में लद्दाख में भारत-चीन सैन्य गतिरोध से जुड़े संदर्भ शामिल थे। इस मुद्दे पर विवाद इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और शीतकालीन सत्र के शेष भाग के लिए आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया।
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राहुल गांधी ने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि संसदीय परंपरा के अनुसार, किसी दस्तावेज़ का उल्लेख करने से पहले उसका प्रमाणीकरण आवश्यक होता है, जिसे उन्होंने पूरा किया था। इसके बावजूद उन्हें बोलने से रोका गया, जो संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ है।
पत्र में उन्होंने लिखा, “माननीय अध्यक्ष, सदन के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में यह आपकी संवैधानिक और संसदीय जिम्मेदारी है कि आप विपक्ष सहित हर सदस्य के अधिकारों की रक्षा करें। बोलने का अधिकार हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा है।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनरल नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक, एपस्टीन फाइल्स और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा से “डरते” हैं।
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