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बजट 2026 पर राहुल गांधी का हमला, बोले—भारत के असली संकटों से अनजान सरकार

राहुल गांधी ने बजट 2026 को बेरोजगारी, कृषि संकट और निवेशकों की चिंता से अनजान बताया, जबकि सरकार ने इसे ऐतिहासिक और सुधारों को गति देने वाला बजट करार दिया।

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय बजट 2026 को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट देश के गहराते आर्थिक और सामाजिक संकटों को नजरअंदाज करता है और सरकार किसी भी तरह का सुधारात्मक कदम उठाने को तैयार नहीं है। बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इसमें बेरोजगारी, कृषि संकट, घरेलू बचत में गिरावट और निवेशकों के घटते भरोसे जैसे अहम मुद्दों को पूरी तरह अनदेखा किया गया है।

राहुल गांधी ने बयान में कहा, “युवा बेरोजगार हैं, मैन्युफैक्चरिंग गिर रही है, निवेशक पूंजी बाहर निकाल रहे हैं, घरेलू बचत तेजी से घट रही है, किसान संकट में हैं और वैश्विक झटकों का खतरा सामने है—लेकिन बजट इन सब से आंखें मूंदे हुए है। यह ऐसा बजट है जो सुधार से इनकार करता है और भारत के असली संकटों को देखने में असफल रहा है।”

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी बजट की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के पास नए विचार खत्म हो चुके हैं और यह बजट भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों पर कोई ठोस जवाब नहीं देता। खड़गे ने आरोप लगाया कि गरीबों के लिए बजट में कुछ भी नहीं है और महंगाई पर काबू पाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में व्यापारिक अनिश्चितता को बड़ी चुनौती बताया गया है, लेकिन बजट में इसका मुश्किल से जिक्र है।

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इसके उलट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट 2026 को “ऐतिहासिक” बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट महिला सशक्तिकरण को मजबूत करता है और सुधारों की यात्रा को तेज करता है। प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवीं बार बजट पेश करने की सराहना करते हुए कहा कि यह बजट आकांक्षाओं को वास्तविकता में बदलने और भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला है।

संसद में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कर सुधारों की घोषणा की, जिनका उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना और जीवन को आसान करना है। इनमें एमएसीटी द्वारा दिए गए ब्याज पर आयकर छूट, विदेश यात्रा पैकेज पर टीसीएस में कटौती और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए कुछ आयात शुल्क छूट समाप्त करना शामिल है।

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