रायपुर की 10वीं की छात्रा महिमा राजपूत अंतरराष्ट्रीय शक्तिसैट मिशन के लिए चयनित, चांद मिशन में करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व
रायपुर की 10वीं की छात्रा महिमा राजपूत का अंतरराष्ट्रीय शक्तिसैट मिशन के लिए चयन हुआ है। वह नई दिल्ली में उपग्रह निर्माण कर अक्टूबर में श्रीहरिकोटा से होने वाले प्रक्षेपण का हिस्सा बनेंगी।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की कक्षा 10वीं की छात्रा महिमा राजपूत ने अपनी प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय 'शक्तिसैट' (ShakthiSAT) सैटेलाइट मिशन के लिए चयनित होकर पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। इस मिशन में वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस कार्यक्रम में दुनिया के 108 देशों की छात्राएं भाग लेंगी और उन्हें उपग्रह निर्माण तथा अंतरिक्ष तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
महिमा राजपूत ने बताया कि उनकी स्कूल की प्राचार्य ने इस मिशन की जानकारी उनकी मार्गदर्शक शिक्षिका को दी थी, जिसके बाद उनका पंजीकरण कराया गया। चयन प्रक्रिया के दौरान उन्हें विज्ञान और उपग्रह तकनीक से जुड़े 21 मॉडल तथा 365 पाठ पढ़ाए गए। इन मॉडलों ने उनके वैज्ञानिक ज्ञान को मजबूत किया और उन्हें उपग्रह निर्माण की बारीकियां सीखने का अवसर मिला।
महिमा ने बताया कि 23 अगस्त को उन्हें नई दिल्ली जाना होगा, जहां विभिन्न देशों से आई छात्राओं के साथ मिलकर दो उपग्रह तैयार किए जाएंगे। मिशन की योजना के अनुसार एक उपग्रह चंद्रमा की सतह पर उतरेगा, जबकि दूसरा चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करेगा। इन दोनों उपग्रहों का प्रक्षेपण अक्टूबर में किया जाएगा।
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महिमा की मार्गदर्शक शिक्षिका योगेश्वरी लाहिड़ी ने बताया कि यह एक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष परियोजना है, जिसमें दुनियाभर के छात्रों का चयन किया गया है। अगस्त में विभिन्न देशों के छात्र भारत आएंगे और नई दिल्ली में वैज्ञानिकों के साथ मिलकर उपग्रह तैयार करेंगे। इसके बाद अक्टूबर में श्रीहरिकोटा से वैज्ञानिकों और छात्रों की मौजूदगी में इन उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जाएगा।
शक्तिसैट मिशन चेन्नई स्थित एयरोस्पेस स्टार्टअप स्पेस किड्ज़ इंडिया की पहल है। इसका उद्देश्य 108 देशों की 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 12,000 छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान, उपग्रह तकनीक और वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।
108 देशों को इस मिशन में शामिल करने के पीछे भी वैज्ञानिक महत्व है। अंतरिक्ष विज्ञान के अनुसार पृथ्वी से सूर्य और चंद्रमा की दूरी उनके व्यास की लगभग 108 गुना होती है, जो ब्रह्मांडीय संतुलन और वैश्विक एकता का प्रतीक मानी जाती है।