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मैं विकास का विरोधी नहीं, अडानी समूह के बढ़ते एकाधिकार के खिलाफ हूं: राज ठाकरे

राज ठाकरे ने कहा कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि अडानी समूह को हर क्षेत्र में मिल रहे प्रोजेक्ट्स से बन रहे कॉरपोरेट एकाधिकार का विरोध कर रहे हैं।

अडानी समूह को दिए जा रहे प्रोजेक्ट्स को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने स्पष्ट किया है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, बल्कि किसी एक औद्योगिक समूह के बढ़ते एकाधिकार के खिलाफ हैं। मंगलवार (13 जनवरी, 2026) को महाराष्ट्र के पुणे जिले में मीडिया से बातचीत करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि उनकी आपत्ति विकास से नहीं, बल्कि एक ही कॉरपोरेट समूह को लगातार बड़े-बड़े प्रोजेक्ट सौंपे जाने की प्रवृत्ति से है।

राज ठाकरे ने कहा, “सीमेंट से लेकर स्टील तक, लगभग हर क्षेत्र के प्रोजेक्ट एक ही कॉरपोरेट इकाई को दिए जा रहे हैं और वह है अडानी समूह। जब सभी बड़े प्रोजेक्ट एक ही समूह को सौंप दिए जाते हैं, तो इसका मतलब है कि देश में उस समूह का प्रभाव बढ़ाया जा रहा है।” उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह का एकाधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए ठीक नहीं है।

MNS प्रमुख ने यह भी कहा कि किसी भी देश के आर्थिक विकास के लिए जरूरी है कि विभिन्न औद्योगिक समूहों को समान अवसर मिलें, ताकि प्रतिस्पर्धा बनी रहे और अर्थव्यवस्था संतुलित रूप से आगे बढ़े। उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनिंदा कंपनियों को ही लगातार बड़े ठेके मिलते हैं, तो छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है।

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राज ठाकरे ने यह दोहराया कि वे बुनियादी ढांचे, उद्योग और रोजगार सृजन के समर्थक हैं, लेकिन विकास के नाम पर किसी एक कारोबारी घराने को अत्यधिक ताकत देना देशहित में नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि प्रोजेक्ट आवंटन में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।

उनके इस बयान के बाद एक बार फिर अडानी समूह को दिए जा रहे प्रोजेक्ट्स और कॉरपोरेट एकाधिकार को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

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