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हमें इसकी जरूरत नहीं: राजस्थान स्वास्थ्य मंत्री के स्वास्थ्य अधिकार कानून बयान पर विधानसभा में हंगामा

राजस्थान स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य अधिकार कानून की जरूरत नहीं, MAA योजना के तहत मुफ्त इलाज और व्यापक कवरेज उपलब्ध है।

राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींमसर के स्वास्थ्य अधिकार (Right to Health) कानून को लेकर दिए गए बयान ने हंगामा मचा दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में इस कानून की कोई आवश्यकता नहीं है, जिससे कांग्रेस पार्टी और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े संगठन नाराज हो गए।

कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा (बूंदी) द्वारा विधानसभा में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए खींमसर ने कहा कि पिछली सरकार ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, उपचार और नर्सिंग होम सोसायटी जैसी निजी अस्पताल संघों के साथ समझौता किया था, लेकिन इसे कानून में शामिल नहीं किया गया।

उन्होंने आगे कहा, “उनका मुख्य सवाल था कि नियम क्यों नहीं बनाए गए? इसका कारण यह है कि हम मुफ्त इलाज उपलब्ध करवा रहे हैं। हमारी ‘MAA’ योजना इतनी व्यापक है कि हमें इस कानून को लाने की आवश्यकता नहीं है। हमारा यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज बुखार से लेकर रोबोटिक सर्जरी तक सब कुछ कवर करता है। 1.36 लाख परिवार और 5 करोड़ लोग 25 लाख रुपये तक की कवरेज पा रहे हैं। हमारी सरकार के सत्ता में आने के बाद 7,826 करोड़ रुपये कैशलेस इलाज पर खर्च किए गए हैं। 2,179 पैकेज हैं, और सिर्फ 850 रुपये प्रीमियम में एक परिवार को 25 लाख रुपये की कवरेज प्रदान की जा रही है। OPD सरकारी अस्पतालों के तहत विभिन्न योजनाओं से कवर है, जो मुफ्त दवा और परीक्षण प्रदान करते हैं।”

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कांग्रेस के विधायक खींमसर के बयान पर असहमति जताते हुए विधानसभा में नारेबाजी करने लगे। कांग्रेस विधायकों ने बैठक के बीच सदन की वेल में घुसकर विरोध प्रदर्शन किया।

यह घटनाक्रम राजस्थान में स्वास्थ्य अधिकार कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को और तेज कर रहा है।

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