आईटीआई से उद्योग तक: राजनाथ सिंह ने पीएम-सेतु को भारत के भविष्य के कुशल कार्यबल का साझा मिशन बनाने का आह्वान किया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उद्योग जगत से पीएम-सेतु पहल में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने इसे सरकारी योजना नहीं, बल्कि उद्योग और सरकार का साझा मिशन बताया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को उद्योग जगत से प्रधानमंत्री कौशल एवं रोजगार से जुड़ी पीएम-सेतु पहल में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस पहल को केवल सरकार की एक योजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे देश के भविष्य के कुशल कार्यबल के निर्माण के लिए सरकार और उद्योग के साझा मिशन के रूप में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में देश को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जिनके पास उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप आधुनिक कौशल और व्यावहारिक प्रशिक्षण हो। इसके लिए औद्योगिक संस्थानों और प्रशिक्षण केंद्रों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
उन्होंने उद्योगों से अपील की कि वे आईटीआई और कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करें। उद्योगों की भागीदारी से युवाओं को आधुनिक तकनीक, मशीनरी और कार्यस्थल की वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव मिल सकता है। इससे प्रशिक्षण पूरा करने के बाद रोजगार हासिल करने में भी उन्हें मदद मिलेगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से देश में बड़ी संख्या में कुशल रोजगार योग्य युवाओं को तैयार करना संभव नहीं है। उद्योगों को प्रशिक्षण की जरूरतों, पाठ्यक्रम और रोजगार के अवसरों को तय करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आईटीआई से निकलने वाले युवाओं को बदलते औद्योगिक वातावरण के अनुरूप तैयार करना समय की आवश्यकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, रोबोटिक्स, उन्नत विनिर्माण और अन्य नई तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कौशल विकास को भी लगातार आधुनिक बनाना होगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम-सेतु जैसी पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उद्योग की मांग और युवाओं के कौशल के बीच मौजूद अंतर को कम करना भी होना चाहिए। उद्योगों की सक्रिय भागीदारी से यह पहल अधिक प्रभावी हो सकती है और भारत के युवा कार्यबल को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार, उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग से भारत एक बड़ा, कुशल और रोजगार योग्य कार्यबल तैयार करने में सफल होगा।
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