भाई-बहन नहीं हैं तो ऐसे मनाएं रक्षाबंधन, इन रिश्तों को बांधें प्रेम और सुरक्षा की राखी
रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, सुरक्षा और सम्मान का पर्व है। सगे भाई-बहन न होने पर भी इसे परिवार, दोस्तों और प्रियजनों के साथ मनाया जा सकता है।
रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास, सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। हालांकि, जिन लोगों के सगे भाई या बहन नहीं हैं, वे भी इस पवित्र त्योहार को पूरे उत्साह के साथ मना सकते हैं।
रक्षाबंधन केवल खून के रिश्तों तक सीमित नहीं है। यह उन सभी लोगों के प्रति प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जो हमारे सुख और सुरक्षा की चिंता करते हैं।
भगवान कृष्ण को मानें भाई
जिन लड़कियों का कोई भाई नहीं है, वे भगवान श्रीकृष्ण को भाई मानकर राखी अर्पित कर सकती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार श्रीकृष्ण की उंगली कटने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांधा था। इसके बाद श्रीकृष्ण ने उन्हें बहन मानकर उनकी रक्षा का वचन दिया।
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माता लक्ष्मी को मानें बहन
जिन लड़कों की कोई बहन नहीं है, वे माता लक्ष्मी को बहन मानकर राखी अर्पित कर सकते हैं। पूजा के बाद राखी को अपने हाथ में बांधा जा सकता है। माता को चूड़ी, साड़ी या बिंदी भी भेंट की जा सकती है।
चचेरे-ममेरे भाई-बहनों के साथ मनाएं पर्व
सगे भाई-बहन नहीं होने पर अपने चचेरे, ममेरे या फुफेरे भाई-बहनों के साथ राखी का त्योहार मनाया जा सकता है। इससे पारिवारिक रिश्तों में प्रेम और अपनापन बढ़ता है।
माता-पिता और दोस्तों को बांधें राखी
अगर भाई या बहन दूर रहते हैं, तो माता-पिता के साथ रक्षाबंधन मनाया जा सकता है। कई परिवारों में माता-पिता को भी राखी बांधने की परंपरा है। इसके अलावा ऐसे दोस्त या पड़ोसी, जो परिवार की तरह साथ खड़े रहते हैं, उनके साथ भी यह पर्व मनाया जा सकता है।
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