राम मंदिर चंदा गबन जांच में एसआईटी को मिली अनियमितताएं, अभी किसी को नहीं मिली क्लीन चिट
राम मंदिर दान राशि गबन मामले की एसआईटी जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। फिलहाल किसी को क्लीन चिट नहीं मिली है और जांच अभी जारी है।
राम मंदिर में प्राप्त दान राशि के कथित गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने दान राशि की गणना और निगरानी व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया है। रिपोर्ट में दान प्रबंधन प्रक्रिया में निगरानी और जवाबदेही की कमी को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।
सूत्रों का कहना है कि जांच के इस चरण में किसी भी व्यक्ति को क्लीन चिट नहीं दी गई है। एसआईटी ने दान राशि की गिनती में शामिल कर्मचारियों के चयन की प्रक्रिया की भी जांच की है। साथ ही, इन कर्मचारियों के राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों से कथित संबंधों की भी पड़ताल की गई है।
जांच टीम ने मंदिर के आंतरिक प्रशासनिक प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। मामले की जटिलता और संवेदनशीलता को देखते हुए एसआईटी ने विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय और अधिक अधिकारियों की तैनाती की मांग की है।
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एसआईटी प्रमुख और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ज्ञानेश्वर तिवारी पंत ने बताया कि टीम ने अब तक एकत्र किए गए साक्ष्यों और सूचनाओं के आधार पर प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अंतिम रिपोर्ट नहीं है और आगे की जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी। पंत ने कहा कि रिपोर्ट की सामग्री गोपनीय है और फिलहाल इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
यह विवाद तब राजनीतिक रूप से चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए करोड़ों रुपये के दान का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं है। उन्होंने अदालतों से मामले का संज्ञान लेने की मांग की थी। अखिलेश यादव ने एसआईटी जांच की दैनिक प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की और भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
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