राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ जितेंद्र मिश्रा की पहली प्रतिक्रिया, बोले- जिम्मेदारी अच्छे से निभाने की क्षमता के लिए प्रार्थना करूंगा
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ जितेंद्र मिश्रा ने नियुक्ति को सौभाग्य बताया। उन्होंने चयन समिति और भगवान राम का आभार जताते हुए जिम्मेदारी निभाने की क्षमता मांगी।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किए गए एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा ने बुधवार को अपनी नियुक्ति पर पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे अपने लिए बड़ा सौभाग्य बताया और कहा कि इतने उम्मीदवारों में से चयन होना भगवान राम का आशीर्वाद है।
जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि वह चयन समिति, श्री राम मंदिर ट्रस्ट और भगवान राम के प्रति आभार व्यक्त करना चाहते हैं, जिन्होंने उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना। उन्होंने कहा, “मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वह मुझे यह जिम्मेदारी अच्छी तरह निभाने की क्षमता प्रदान करें।”
उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना में 43 वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद अब उन्हें श्री राम मंदिर और राम भक्तों की सेवा करने का अवसर मिला है। मिश्रा ने इसे भगवान राम की कृपा बताया और कहा कि वह सौंपे गए दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाने का प्रयास करेंगे।
जितेंद्र मिश्रा का नाम 5,585 आवेदनों में से चुने गए तीन अंतिम उम्मीदवारों में शामिल था। उनकी नियुक्ति मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन को लेकर सामने आए विवाद के बाद हुई है। इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और चंपत राय ने महासचिव पद से इस्तीफा दिया था।
ट्रस्ट के समिति सचिव समीर पांडा ने बताया कि चयन समिति ने नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन विशेषज्ञता, ईमानदारी और दूरदृष्टि के आधार पर तीन अत्यधिक योग्य पेशेवरों की सिफारिश की थी। चयन प्रक्रिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्क्रीनिंग के साथ मैनुअल मूल्यांकन भी किया गया।
कुल 5,585 आवेदनों में से 3,577 उम्मीदवारों ने 600 अंकों की मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए आवश्यक जानकारी जमा की। इसके बाद 470 या उससे अधिक अंक पाने वाले 108 उम्मीदवारों को वर्चुअल बातचीत के लिए चुना गया। इनमें से 16 उम्मीदवारों का 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में व्यक्तिगत साक्षात्कार हुआ।
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से ताल्लुक रखने वाले जितेंद्र मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया। उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक भी मिल चुके हैं।
6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन हुए मिश्रा ने 39 वर्षों से अधिक समय तक सेवा की और 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए। पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के रूप में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महत्वपूर्ण परिचालन जिम्मेदारी संभाली। अपने करियर में उन्होंने 3,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी और फाइटर स्क्वाड्रन तथा दो अग्रिम वायुसेना अड्डों की कमान संभाली। वह एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट (एएसटीई) के कमांडेंट भी रहे।
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