लाल किला विस्फोट मामले में बड़ा खुलासा, आतंकियों ने टेरर इंजीनियरिंग के लिए किया AI और चैटजीपीटी का इस्तेमाल
एनआईए जांच में खुलासा हुआ कि लाल किला विस्फोट के आरोपियों ने रॉकेट आईईडी बनाने और ड्रोन हमले की योजना के लिए एआई प्लेटफॉर्म और चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया।
नई दिल्ली स्थित लाल किले के पास पिछले वर्ष नवंबर में हुए विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने “टेरर इंजीनियरिंग” के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्लेटफॉर्म और चैटजीपीटी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, एनआईए द्वारा दायर 7,500 पन्नों की चार्जशीट में बताया गया है कि आरोपियों ने रॉकेट आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) तैयार किया था। इसका परीक्षण जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड जंगल में किया गया था। जांच एजेंसी ने कहा कि आईईडी तैयार करने में लगभग प्रयोगशाला स्तर की तकनीकी प्रक्रिया अपनाई गई थी।
चार्जशीट के अनुसार, आरोपी जासिर बिलाल वानी ने 2024 से 2025 के बीच हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर में कई बार ठहरकर साजिश के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की। उसे दूसरे आरोपी डॉ. उमर उन नबी से डॉ. आदिल अहमद राथर ने मिलवाया था।
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एनआईए ने बताया कि आदिल ने आईईडी बनाने के लिए जरूरी सामग्री, जैसे पाउडर चीनी और एनपीके उर्वरक के रूप में पोटेशियम नाइट्रेट, जासिर को उपलब्ध कराया। इसके बाद जासिर ने यूट्यूब और चैटजीपीटी पर “रॉकेट कैसे बनाएं” और “मिश्रण का अनुपात क्या होना चाहिए” जैसी जानकारी खोजी।
जांच में यह भी सामने आया कि जासिर ने फ्लिपकार्ट से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ट्रिगर मैकेनिज्म से जुड़े सामान खरीदे थे। इनमें सेंसर स्विच, हीट गन, रिमोट कंट्रोल आरएफ किट, सोल्डरिंग किट और इलेक्ट्रॉनिक एलईडी किट शामिल थे।
एनआईए के अनुसार, आरोपियों का संबंध कट्टरपंथी संगठन एक्यूआईएस/एजीयूएच की विचारधारा से प्रेरित व्यापक जिहादी साजिश से था। जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि कुछ आरोपी मेडिकल पेशे से जुड़े थे और ड्रोन के जरिए हमले की योजना बना रहे थे।
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