रेजीनगर उपचुनाव: ममता के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी भी नामांकन वापस लेंगे
रेजीनगर उपचुनाव में रबीउल आलम चौधरी ने प्रशासनिक दबाव का आरोप लगाते हुए नामांकन वापस लेने का फैसला किया। इससे पहले नंदीग्राम में संचिता प्रधान डे भी हट चुकी हैं।
पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने अपना नामांकन वापस लेने का फैसला किया है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख शनिवार है। उन्होंने प्रशासन की ओर से दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है।
रबीउल ने कहा कि पार्टी को नया चुनाव चिह्न मिला है और कार्यकर्ताओं को मैदान में नहीं उतारा जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। रबीउल के मुताबिक, उन्होंने इस बारे में ममता बनर्जी से बातचीत की है।
यह घटनाक्रम नंदीग्राम उपचुनाव से जुड़े घटनाक्रम के एक दिन बाद सामने आया है। ममता बनर्जी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से अपना नामांकन वापस ले लिया था।
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इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन दिया, लेकिन पुलिस ने शुक्रवार को उन्हें करीब दो दशक पुराने हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उन्हें पूर्व मेदिनीपुर जिले की हल्दिया अदालत में पेश करेगी। उनके खिलाफ चार वारंट लंबित बताए गए हैं।
कांग्रेस नेता के अनुसार, मिलन प्रधान को चांदीपुर के एक होटल से पकड़ा गया। उनका नाम नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े 12 से अधिक मामलों में सामने आया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने आरोप लगाया कि कार्रवाई का उद्देश्य विपक्ष को चुनावी मैदान से हटाना है। भाजपा ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस अपना काम कर रही है और गिरफ्तारी का राजनीति से कोई संबंध नहीं है।
नंदीग्राम का 2007 का भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के राजनीतिक सफर में महत्वपूर्ण रहा है।
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