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गणतंत्र दिवस पर सुलेख प्रदर्शनी ने दिखाया, भारत की असली ताकत सांस्कृतिक विविधता में निहित

पुणे में गणतंत्र दिवस पर आयोजित सुलेख प्रदर्शनी ने भारतीय और फ्रांसीसी लिपियों के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता, संवाद और एकता की भावना को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुणे में आयोजित एक अनोखी सुलेख प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया कि भारत की असली शक्ति उसकी सांस्कृतिक विविधता में ही निहित है। “स्क्रिप्टेड डायलॉग्स—ए कॉलिग्राफिक कन्वर्सेशन” नामक यह प्रदर्शनी देवनागरी और गुरुमुखी से लेकर फ्रेंच और लैटिन लिपियों तक की समृद्ध परंपराओं को एक साथ प्रस्तुत करती है। यह आयोजन एलायंस फ्रांसेज़ की सांस्कृतिक पहल का हिस्सा है और इसे पुणे के द रवि परांजपे स्टूडियो में 27 जनवरी तक देखा जा सकता है।

प्रदर्शनी में प्रवेश करते ही दर्शकों को “रंगीला मारो ढोलना” की कृति दिखाई देती है, जिसे गुजराती और फ्रेंच भाषाओं में दर्शाया गया है। इसका अर्थ है—“मेरा रंगीन प्रेमी”। एक ओर जहां संस्कृत के मंत्रों में आनंद और सुख की भावना छिपी हुई है, वहीं दूसरी ओर फ्रेंच उद्धरण यह सवाल उठाते हैं कि असली खुशी आखिर रहती कहां है।

बंगाली कविता के माध्यम से रवींद्रनाथ टैगोर और विक्टर ह्यूगो को श्रद्धांजलि दी गई है, जहां कला और अनुवाद के जरिए दो महाद्वीपों के महान कवियों को जोड़ा गया है। गुरुमुखी लिपि के अक्षर प्रसिद्ध वास्तुकार ले कोर्बुजिए की स्थापत्य दृष्टि की याद दिलाते हैं, साथ ही उनमें समानता और भाईचारे जैसे पंजाबी मूल्यों की झलक भी मिलती है।

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इस प्रदर्शनी को एलायंस फ्रांसेज़, भोपाल की पद्मजा श्रीवास्तव ने बेहद सूक्ष्मता और कलात्मक दृष्टि से क्यूरेट किया है। यह आयोजन न केवल भाषाई और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कला कैसे सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ सकती है।

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