आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने दिया इस्तीफा, बोले- अपमानित होकर राजनीति नहीं कर सकता
आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी नेतृत्व से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलता और लगातार उपेक्षा से वह आहत हैं।
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को गुरुवार को बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। तिवारी ने पार्टी नेतृत्व से नाराजगी जताते हुए कहा कि आरजेडी में समर्पित और ईमानदार कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार अपमानित महसूस करने के बाद अब वह राजनीति जारी नहीं रख सकते।
मृत्युंजय तिवारी ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन उनकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के सामने भी अपनी चिंताएं रखीं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
तिवारी ने बिना किसी का नाम लिए पार्टी के कुछ नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग आरजेडी को दीमक की तरह कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी यादव ऐसे लोगों से घिरे रहेंगे तो पार्टी में ईमानदार और मेहनती कार्यकर्ताओं के लिए जगह नहीं बचेगी।
और पढ़ें: राजद के स्थापना दिवस पर लालू-तेजस्वी का भाजपा-आरएसएस पर हमला, बोले- आखिरी सांस तक लड़ाई जारी रहेगी
उन्होंने कहा, "मेरे लिए पार्टी में बने रहने का कोई औचित्य नहीं था, क्योंकि मैं अपमानित होकर राजनीति नहीं कर सकता। मैंने आरजेडी के मुश्किल दौर में पार्टी का साथ दिया। साल 2014 में लालू प्रसाद यादव ने मुझे पार्टी प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी थी, जिसे मैंने पूरी निष्ठा से निभाया।"
मृत्युंजय तिवारी बिहार की राजनीति में आरजेडी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। साल 2014 से वह पार्टी की ओर से लगातार मीडिया में पक्ष रखते रहे और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) तथा जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर हमलावर रहे।
उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। 243 सीटों वाली विधानसभा में आरजेडी केवल 25 सीटों पर जीत हासिल कर सकी थी, जबकि एनडीए ने 200 से अधिक सीटों पर कब्जा जमाया था।
चुनाव में बीजेपी ने 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया था, जबकि जेडीयू को 85 सीटें मिली थीं। वहीं, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 19 और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने 5 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को केवल 6 सीटों पर सफलता मिली थी। मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे को आरजेडी के लिए एक और राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।