रॉबर्ट वाड्रा को दिल्ली कोर्ट का समन, शिकोहपुर जमीन सौदे में मनी लॉन्ड्रिंग केस में पेशी के आदेश
दिल्ली कोर्ट ने हरियाणा के शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा को समन जारी कर 16 मई को पेश होने का आदेश दिया।
दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा को समन जारी किया है। यह मामला हरियाणा के शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से संबंधित है।
विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोत्रा ने वाड्रा और अन्य आरोपियों को 16 मई को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। इस संबंध में विस्तृत आदेश का इंतजार किया जा रहा है। ईडी ने जुलाई 2025 में इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था, जो किसी जांच एजेंसी द्वारा वाड्रा के खिलाफ पहली आपराधिक चार्जशीट मानी जा रही है।
यह मामला वर्ष 2008 के उस भूमि सौदे से जुड़ा है, जिसमें स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने हरियाणा के गुरुग्राम जिले के शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन खरीदी थी। यह कंपनी रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी बताई जाती है।
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यह जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड से 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी, जबकि वर्ष 2012 में इसे रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। उस समय हरियाणा में कांग्रेस सरकार सत्ता में थी।
इस सौदे पर अक्टूबर 2012 में विवाद तब बढ़ा जब आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने म्यूटेशन को रद्द कर दिया था। उन्होंने इसे राज्य के नियमों और भूमि समेकन कानून के उल्लंघन से जुड़ा बताया था।
रॉबर्ट वाड्रा ने हमेशा इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। उन्होंने कहा है कि यह मामला उनके और उनके परिवार, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी शामिल हैं, को निशाना बनाने के लिए चलाया जा रहा है।
ईडी इस समय वाड्रा से जुड़े दो अन्य मामलों की भी जांच कर रही है, जिनमें एक यूके स्थित हथियार सलाहकार संजय भंडारी से जुड़ा मामला और राजस्थान के बीकानेर भूमि सौदे से संबंधित जांच शामिल है।
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