चिकन नेक के पास 2,077 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना, नेपाल सीमा के साथ बनेगा वैकल्पिक मार्ग
सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास 2,077 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-327 को चार लेन किया जाएगा। परियोजना नेपाल, भूटान और पूर्वोत्तर भारत से संपर्क मजबूत करेगी तथा यातायात सुगम बनाएगी।
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है, के आसपास बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में 31.02 किलोमीटर लंबे बागडोगरा-पानीटंकी-खरीबाड़ी-गल्गलिया खंड को चार लेन में बदलने के लिए 2,077.18 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
इस परियोजना के तहत तीन बड़े पुल, एक रोड ओवरब्रिज, पांच हाथी अंडरपास और सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड बनाए जाएंगे। इससे लोगों की आवाजाही सुरक्षित होने के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
यह चार लेन सड़क गल्गलिया के पास से शुरू होकर बागडोगरा तक जाएगी, जहां यह बागडोगरा हवाई अड्डे के नजदीक राष्ट्रीय राजमार्ग-27 से जुड़ेगी। बागडोगरा हवाई अड्डे पर जल्द नया यात्री टर्मिनल भी तैयार होने वाला है, जिसकी क्षमता व्यस्त समय में प्रति घंटे 3,000 यात्रियों को संभालने की होगी। टर्मिनल में A321 और B737 जैसे विमानों के लिए 10 पार्किंग बे तथा बहुस्तरीय कार पार्किंग की सुविधा होगी। इसे नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल वाला ‘ग्रीन बिल्डिंग’ बनाया जाएगा।
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गडकरी के अनुसार, परियोजना से बागडोगरा, नक्सलबाड़ी, खरीबाड़ी और पानीटंकी में यातायात का दबाव कम होगा और नेपाल, भूटान तथा बांग्लादेश से संपर्क बेहतर होगा। कृषि, बागवानी और चाय समेत स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने परियोजना का स्वागत करते हुए कहा कि इसका महत्व क्षेत्रीय संपर्क से कहीं अधिक है। उन्नत एनएच-327, एनएच-27 के वैकल्पिक मार्ग के रूप में काम करेगा और पानीटंकी से भारत-बांग्लादेश सीमा के फुलबाड़ी तक 38 किलोमीटर लंबे महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारे को मजबूती देगा।
भारत सिलीगुड़ी कॉरिडोर में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने के लिए भूमिगत रेल गलियारे और अन्य रणनीतिक परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है। करीब 40 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित भूमिगत रेल मार्ग के साथ मौजूदा रेल लाइनों की क्षमता बढ़ाने और सिलीगुड़ी-वाराणसी हाई-स्पीड रेल गलियारे की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।
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