डॉलर के मुकाबले रुपया 8 पैसे गिरकर 90.98 पर पहुंचा
मजबूत डॉलर मांग और विदेशी पूंजी निकासी के दबाव में रुपया शुरुआती कारोबार में 8 पैसे गिरकर 90.98 पर पहुंचा, जबकि कमजोर शेयर बाजार और वैश्विक अनिश्चितता ने दबाव बढ़ाया।
मंगलवार (20 जनवरी 2026) को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 8 पैसे की गिरावट के साथ 90.98 पर आ गया। मजबूत डॉलर मांग, खासकर धातु आयातकों की ओर से और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता, जिसमें अमेरिका से जुड़े नए विस्तारवादी संकेत भी शामिल हैं, ने जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ा दिया है। इसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर साफ देखा जा रहा है। इसके अलावा, घरेलू शेयर बाजार में सुस्ती और विदेशी पूंजी के बाहर जाने से भी रुपये पर दबाव बना हुआ है।
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.91 पर खुला और कारोबार के दौरान गिरकर 90.98 तक पहुंच गया, जो इसके पिछले बंद स्तर से 8 पैसे नीचे है। सोमवार (19 जनवरी) को रुपया 12 पैसे कमजोर होकर 90.90 पर बंद हुआ था, जो इसके रिकॉर्ड निचले बंद स्तर के करीब था। इससे पहले 16 दिसंबर 2025 को रुपया दिन के कारोबार में 91.14 के सबसे निचले स्तर तक गया था और 90.93 पर बंद हुआ था।
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रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप टैरिफ की वैधता पर फैसला देने वाला है, जिसका सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा। फिलहाल वैश्विक बाजार ‘रिस्क-ऑफ’ मोड में हैं, जहां सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में खरीद बढ़ रही है।
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.44% गिरकर 98.95 पर आ गया। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.11% की तेजी के साथ 64.01 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी दिखी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 311.33 अंक गिरकर 82,934.85 पर और निफ्टी 99.5 अंक टूटकर 25,486 पर आ गया। एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 3,262.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 3 अरब डॉलर से अधिक निकाल चुके हैं। लगातार पूंजी निकासी के कारण रुपये की संवेदनशीलता बढ़ गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है और रुपया 91.07 के ऊपर टिकता है, तो यह 91.70 से 92.00 के स्तर तक जा सकता है, जब तक कि आरबीआई की ओर से सक्रिय हस्तक्षेप न हो।
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