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शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 11 पैसे मजबूत, भारत-ईयू व्यापार समझौते से मिला सहारा

डॉलर इंडेक्स में नरमी और भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के सहारे रुपया शुरुआती कारोबार में 11 पैसे मजबूत होकर 91.57 पर पहुंचा, जबकि शेयर बाजारों में भी जोरदार तेजी देखी गई।

बुधवार (28 जनवरी, 2026) को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 11 पैसे की मजबूती के साथ 91.57 पर पहुंच गया। रुपये को यह मजबूती डॉलर इंडेक्स में नरमी और भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के सकारात्मक धारणा के कारण मिली।

रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने और यूरोप के साथ लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापार समझौते के पूरा होने से बाजार को भरोसा मिला, जिसके चलते रुपया मजबूत खुला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 91.60 पर खुला और कुछ ही देर में 91.57 तक पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर के मुकाबले 11 पैसे की बढ़त को दर्शाता है।

इससे एक दिन पहले मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को रुपया अपने अब तक के रिकॉर्ड निचले स्तर से उबरते हुए 22 पैसे मजबूत होकर 91.68 (अस्थायी) पर बंद हुआ था। शुरुआती कारोबार के दौरान इसने 91.66 का स्तर भी छुआ था।

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रिपोर्ट ने यह भी कहा कि डॉलर/रुपया के लिए 92.00 का स्तर निकट अवधि में अहम बना हुआ है। यदि यह स्तर टिकाऊ रूप से पार होता है, तो जोड़ी 92.20 से 92.50 के दायरे की ओर बढ़ सकती है। भारतीय रिज़र्व बैंक की बाजार में निरंतर मौजूदगी और डॉलर की कमजोरी रुपये को स्थिर बनाए रखने में मदद कर सकती है, जिससे निकट भविष्य में यह 90.80 से 91.00 के स्तर की ओर लौट सकता है।

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.13% गिरकर 96.09 पर कारोबार कर रहा था। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.53% चढ़कर 67.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

घरेलू शेयर बाजार में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 646.49 अंकों की तेजी के साथ 82,503.97 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 196.7 अंक चढ़कर 25,372.10 पर कारोबार करता दिखा। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 3,068.49 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की।

भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत पूरी होने की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत परिधान, रसायन और फुटवियर जैसे कई घरेलू क्षेत्रों को 27 देशों वाले ईयू बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि ईयू को भारत में कारों और वाइन पर रियायती शुल्क के साथ बाजार तक पहुंच मिलेगी। इस समझौते को लगभग दो अरब लोगों के बाजार का निर्माण करने वाला “मदर ऑफ ऑल डील्स” बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिटेन, न्यूज़ीलैंड और ओमान के साथ हालिया व्यापार समझौतों के बाद यह डील वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका का मजबूत संकेत देती है।

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