सज्जन कुमार का 80 साल की उम्र में निधन, 1984 सिख विरोधी दंगों के मामलों में दोषसिद्धि की पूरी कहानी
पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 1984 सिख विरोधी दंगों से जुड़े दो मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा हुई थी।
पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। कुमार तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। उनके निधन के साथ 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े कई दशकों पुराने कानूनी मामले का एक अध्याय समाप्त हो गया।
सज्जन कुमार के खिलाफ मामले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नवंबर 1984 में हत्या के बाद दिल्ली में भड़की हिंसा से जुड़े थे। उन पर भीड़ को उकसाने और हिंसा में भूमिका निभाने के आरोप लगे थे।
2013 में निचली अदालत से मिली थी राहत
दिल्ली कैंट मामले में अप्रैल 2013 में निचली अदालत ने कुमार को बरी कर दिया था, जबकि पांच अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया। इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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2018 में उम्रकैद की सजा
दिसंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए सज्जन कुमार को पांच सिखों की हत्या और गुरुद्वारा जलाने से जुड़े मामले में दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद सज्जन कुमार ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती दी।
अन्य मामलों में अलग-अलग फैसले
सज्जन कुमार को 2023 में सुल्तानपुरी क्षेत्र में तीन सिखों की हत्या से जुड़े मामले में बरी कर दिया गया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
फरवरी 2025 में उन्हें सरस्वती विहार मामले में फिर दोषी ठहराया गया। यह मामला सिख पिता-पुत्र जसवंत सिंह और तरुणदीप सिंह की हत्या से संबंधित था। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें हत्या समेत अन्य अपराधों में उम्रकैद की सजा सुनाई।
जनवरी 2026 में उन्हें जनकपुरी-विकासपुरी मामले में भी बरी कर दिया गया। हालांकि, दो मामलों में मिली उम्रकैद के कारण उनकी रिहाई नहीं हो सकी।
निधन के समय सज्जन कुमार की 2018 की दोषसिद्धि के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित थी। इस तरह 1984 दंगों से जुड़े उनके खिलाफ कानूनी सफर का अंत हो गया।
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