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मित्रों को गलत बताने का साहस जरूरी: पश्चिम एशिया युद्ध पर सलमान खुर्शीद की भारत की विदेश नीति पर टिप्पणी

सलमान खुर्शीद ने कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध के बीच भारत को विदेश नीति में स्पष्टता लानी चाहिए और रूस-चीन से संवाद बढ़ाकर संतुलित कूटनीति अपनानी चाहिए।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश को अपने रुख पर अधिक स्पष्टता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अपने मित्र देशों से भी यह कहने का साहस होना चाहिए कि वे गलत हैं, यदि परिस्थितियां ऐसी मांग करती हैं।

एक साक्षात्कार में खुर्शीद ने कहा कि मौजूदा समय में भारत की विदेश नीति को लेकर स्पष्ट व्याख्या की कमी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय को समझने वाले लोग भी पूरी तरह से स्थिति से अवगत नहीं हैं और कई पहलुओं पर “अंधेरे में” हैं।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर बात करते हुए खुर्शीद ने कहा कि अभी तक इस संघर्ष के कम होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष के अपने लक्ष्य के करीब पहुंचने के संकेत नहीं दिख रहे, जो कि एक चिंताजनक स्थिति है।

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उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को अपनी विदेश नीति में “कोर्स करेक्शन” करने की जरूरत है और इसके लिए रूस और चीन जैसे महत्वपूर्ण देशों के साथ संवाद के रास्ते खोलने चाहिए। खुर्शीद ने इन दोनों देशों को “कमरे में मौजूद दो बड़े हाथी” बताते हुए कहा कि उनके साथ बातचीत जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में केवल रणनीति ही नहीं, बल्कि स्पष्ट संवाद और संतुलन भी जरूरी है। वर्तमान हालात में भारत को अपनी भूमिका और रुख को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

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