TMC में बगावत तेज, शताब्दी रॉय बोलीं- 28 में से 20 सांसदों को गद्दार नहीं कहा जा सकता
टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए बागी गुट का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 28 में से 20 सांसदों को गद्दार नहीं कहा जा सकता।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी संकट और गहरा गया, जब अभिनेत्री से नेता बनीं और चार बार की सांसद शताब्दी रॉय ने वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी गुट का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए चुनावी हार के बाद आत्ममंथन न होने का आरोप लगाया और संकेत दिया कि बागी सांसद आगे भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन जारी रखेंगे।
शताब्दी रॉय ने कहा कि पार्टी में असंतोष हार की वजह से नहीं, बल्कि हार के कारणों की समीक्षा न होने के कारण पैदा हुआ। उन्होंने कहा, “4 मई से ही असंतोष शुरू हो गया था। चुनावी हार का कोई पोस्टमार्टम नहीं हुआ। स्थानीय नेताओं की राय को नजरअंदाज कर दिया गया।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने अधिकांश जिम्मेदारियां अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को सौंप दी थीं, जबकि अभिषेक ने चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) पर अत्यधिक भरोसा किया। रॉय ने कहा कि पार्टी की हार के वास्तविक कारणों पर कभी गंभीर चर्चा नहीं हुई।
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बागी सांसदों का बचाव करते हुए उन्होंने कहा, “अगर 28 में से 8 सांसद अलग रुख अपनाते तो उन्हें गद्दार कहा जा सकता था, लेकिन जब 20 सांसद एक अलग रास्ता चुन रहे हैं तो सभी को गद्दार कैसे कहा जा सकता है?”
शताब्दी रॉय ने यह भी पुष्टि की कि असंतुष्ट सांसद जल्द ही एक अलग संसदीय गुट बनाने की तैयारी में हैं और एनडीए को समर्थन जारी रखेंगे। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की हार के पीछे भ्रष्टाचार और कुछ चुनिंदा सलाहकारों पर अत्यधिक निर्भरता भी प्रमुख कारण रही।
उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वह स्वयं भी टीएमसी छोड़ सकती हैं। रॉय ने यह भी खुलासा किया कि उनकी सुवेंदु अधिकारी से बातचीत हुई है और उन्होंने हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है।
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