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सत्य निकेतन इमारत हादसा: 28 लाख संरचनाओं की जांच में कई इमारतें मिलीं खतरनाक

सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद एमसीडी के सर्वेक्षण पर सवाल उठे हैं। करीब 28 लाख संरचनाओं की जांच में 19 इमारतें खतरनाक मिली थीं, जबकि अवैध निर्माण जारी रहा।

दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने से कम से कम सात लोगों की मौत के बाद राजधानी में अवैध और जर्जर निर्माण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) के जून में किए गए सर्वेक्षण में करीब 28 लाख इमारतों और संरचनाओं की जांच की गई थी, जिनमें 19 को खतरनाक पाया गया।

एमसीडी के अनुसार, रविवार को ढही इमारत 1990 के दशक में करीब 55 वर्ग गज के भूखंड पर बनाई गई थी। यह पुनर्वास कॉलोनी में स्थित थी और इसमें बेसमेंट के साथ भूतल से चौथी मंजिल तक निर्माण था। हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि इमारत करीब 50 साल पुरानी थी और इसका निर्माण 1970 के दशक में हुआ था।

अधिकारियों के मुताबिक, पुनर्वास कॉलोनियों में मूल रूप से केवल भूतल और पहली मंजिल तक निर्माण की अनुमति दी गई थी। ढही इमारत में लड़कों का छात्रावास चल रहा था। एमसीडी ने बताया कि इमारत का कोई स्वीकृत भवन नक्शा उपलब्ध नहीं था और उसके खिलाफ पहले कोई शिकायत भी दर्ज नहीं हुई थी।

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एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने कहा कि मजिस्ट्रेट जांच से इमारत गिरने के तत्काल कारणों का पता चल सकेगा। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था और बेसमेंट में पानी जमा होने से संरचना कमजोर हुई, जिसके बाद हादसा हुआ।

एमसीडी ने आसपास की एक इमारत में स्थित लड़कियों के पीजी के किरायेदारों को भी बाहर निकाल दिया और परिसर को सील कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि आसपास की कम से कम चार इमारतों को दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 349 के तहत खाली करने के नोटिस दिए गए हैं।

एमसीडी के रिकॉर्ड के अनुसार, इमारत के मालिक ने पिछले वर्ष संपत्ति कर और 2007 में रूपांतरण शुल्क जमा किया था। जून से सितंबर के बीच निगम ने करीब 980 संपत्तियों में तोड़फोड़ की, 460 संपत्तियां सील कीं, अनधिकृत निर्माण को लेकर 1,500 से अधिक कारण बताओ नोटिस जारी किए और 720 से अधिक ध्वस्तीकरण आदेश दिए।

इस हादसे ने एमसीडी के मानसून पूर्व सर्वेक्षण की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं। इस वर्ष 27,84,286 इमारतों का दृश्य निरीक्षण किया गया, लेकिन केवल 19 को खतरनाक घोषित किया गया। अधिकारियों के अनुसार, सर्वेक्षण में मुख्य रूप से दरारों, झुकी दीवारों और अन्य दिखाई देने वाले संकेतों की जांच की जाती है।

इस साल दिल्ली में कई घातक हादसे हो चुके हैं। 30 मई को सैदुलाजाब में इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई थी, जबकि 3 जून को हौज रानी में आग लगने से 23 लोगों की जान गई थी।

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