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सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की आज करेंगे त्रिपक्षीय रक्षा समझौता, बदल सकते हैं पश्चिम एशिया के रणनीतिक समीकरण

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। इससे पश्चिम एशिया के सुरक्षा समीकरण बदल सकते हैं और तीनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और मजबूत होगा।

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की शुक्रवार को जेद्दा में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। यह समझौता ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच पांच महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई, होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद रहा और खाड़ी के कई देश भी इसकी चपेट में आए।

इस समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बैठक करेंगे। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी इस अवसर पर जेद्दा में मौजूद हैं।

दरअसल, सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसकी तुलना नाटो जैसी सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था से की गई थी। इस समझौते के अनुसार किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान मुस्लिम देशों में एकमात्र परमाणु शक्ति होने के कारण यह समझौता विशेष महत्व रखता है।

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कई महीनों से तुर्की के इस सुरक्षा ढांचे में शामिल होने की चर्चा चल रही थी। क्षेत्रीय हालात बिगड़ने के बाद बातचीत तेज हुई और अब तीनों देश औपचारिक रूप से रक्षा सहयोग को नई दिशा देने जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से सऊदी अरब को तुर्की की उन्नत ड्रोन तकनीक और पाकिस्तान के सामरिक अनुभव का लाभ मिल सकता है। वहीं तुर्की को सऊदी निवेश से अपने रक्षा उद्योग, पांचवीं पीढ़ी के कान लड़ाकू विमान, स्वदेशी पनडुब्बी और ड्रोन परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। पाकिस्तान को आर्थिक सहयोग मिलने के साथ-साथ क्षेत्रीय रणनीतिक समर्थन भी मिल सकता है।

भारत ने पहले ही कहा था कि वह सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौते के प्रभावों पर नजर रखेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं का गंभीरता से आकलन करेगा।

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