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SIR प्रक्रिया में कोई बाधा बर्दाश्त नहीं होगी: सुप्रीम कोर्ट का सभी राज्यों को कड़ा संदेश

सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया में बाधा न डालने की चेतावनी दी। अधिकारियों की सूची, मतदाता मैपिंग और देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सभी राज्यों को आदेश समझना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि जहां सुधार की जरूरत होगी, वहां अदालत निर्देश जारी करेगी, लेकिन प्रक्रिया में रुकावट नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा, “सभी राज्यों को यह समझना चाहिए।”

सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों की सूची सौंपने में देरी और असंगतियों पर सवाल उठाए। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग ने राज्य से अधिकारियों के नाम नहीं मांगे थे। वहीं, ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि 8,500 अधिकारियों की सूची जमा कर दी गई है और अदालत से इसे स्वीकार करने का अनुरोध किया।

हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से पेश अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई सूची नहीं मिली। इस पर CJI ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि तथ्यात्मक विवाद नहीं होना चाहिए, अन्यथा मुख्य सचिव को तलब किया जा सकता है।

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अदालत ने मतदाता मैपिंग और ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणी में आए मतदाताओं को लेकर भी सवाल उठाए। बताया गया कि करीब 70 लाख मतदाता इस श्रेणी में हैं, जिनमें से 50% से अधिक मामलों में केवल वर्तनी की छोटी गलतियां कारण हो सकती हैं।

अदालत ने अनुशासन पर भी जोर दिया और एक साथ कई पक्षों के बोलने पर नाराजगी जताते हुए कहा, “यह कोर्ट नंबर 1 है, कोई बाजार नहीं।”

बताया गया कि पूरी प्रक्रिया 14 फरवरी तक पूरी होने वाली है। ड्राफ्ट मतदाता सूची में लगभग 7.08 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 6.75 करोड़ की पहचान हो चुकी है, जबकि करीब 32 लाख मतदाताओं की पहचान बाकी है।

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