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NEET PG कटऑफ घटाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने NEET PG कटऑफ में भारी कमी के खिलाफ याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा। याचिकाकर्ताओं ने इसे असंवैधानिक और मेडिकल शिक्षा के मानकों को कमजोर करने वाला बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (4 फरवरी 2026) को NEET-PG 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कटऑफ प्रतिशत में भारी कमी करने के नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने केंद्र सरकार, NBEMS, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 6 फरवरी को निर्धारित की गई है।

देशभर में 18,000 से अधिक पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटें खाली रहने के कारण NBEMS ने NEET-PG 2025 में प्रवेश के लिए क्वालिफाइंग प्रतिशत में बड़ा बदलाव किया था। बोर्ड ने आरक्षित श्रेणियों के लिए कटऑफ 40 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया, जिससे 800 में से माइनस 40 तक अंक पाने वाले उम्मीदवार भी पीजी मेडिकल सीटों की तीसरे चरण की काउंसलिंग में भाग ले सकेंगे। वहीं, सामान्य श्रेणी के लिए कटऑफ 50 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया।

यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन, डॉ. सौरव कुमार, डॉ. लक्ष्य मित्तल और डॉ. आकाश सोनी ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता मानदंड बदलना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है। अभ्यर्थियों ने पहले घोषित कटऑफ के आधार पर तैयारी और करियर से जुड़े फैसले किए थे, इसलिए बाद में नियम बदलना अनुचित है।

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याचिका में यह भी कहा गया कि पीजी मेडिकल शिक्षा को व्यावसायिक गतिविधि की तरह नहीं देखा जा सकता और नियामक संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों को बनाए रखें। चिकित्सा समुदाय के कई वर्गों ने NBEMS के इस फैसले को “अभूतपूर्व और तर्कहीन” बताया है।

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