मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी दौरे के बाद कथित शुद्धिकरण पर एससी-एसटी सांसदों में नाराजगी, राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी दौरे के बाद कथित शुद्धिकरण रस्म को लेकर एससी-एसटी सांसदों ने नाराजगी जताई। सांसदों ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड के हल्द्वानी दौरे के बाद कथित तौर पर किए गए “शुद्धिकरण” कार्यक्रम को लेकर एससी-एसटी सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई है। बुधवार को नई दिल्ली में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े सांसदों की एक बैठक हुई, जिसमें इस कथित घटना पर चर्चा की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य खड़गे के हल्द्वानी दौरे के बाद सामने आए कथित “शुद्धिकरण” कृत्य पर विचार करना था। सांसदों ने इस घटना को लेकर चिंता व्यक्त की और इसे सामाजिक समानता तथा संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर देखा।
बैठक में शामिल सांसदों ने कथित घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए संबंधित मामले में राष्ट्रपति के हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना था कि देश में संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान देता है तथा किसी भी व्यक्ति के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
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मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और वर्तमान में राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं। उनके हल्द्वानी दौरे के बाद कथित तौर पर एक स्थान के “शुद्धिकरण” की बात सामने आई, जिसके बाद एससी-एसटी सांसदों ने सामूहिक रूप से इस मुद्दे पर चर्चा की।
सांसदों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक मर्यादाओं और सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति से मामले का संज्ञान लेने और आवश्यक हस्तक्षेप करने की अपील की है।
इस मुद्दे ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कथित “शुद्धिकरण” कार्यक्रम के आयोजकों या इसके पीछे के कारणों के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि अभी बाकी है।
एससी-एसटी सांसदों की बैठक ऐसे समय हुई है, जब देश में जातिगत भेदभाव, सामाजिक समानता और संवैधानिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच लगातार बहस होती रही है। सांसदों ने जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक की गरिमा और समानता की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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