ईसाई धर्म को सच्चा धर्म बताने वाले पादरी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई पादरी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाई। मामला धर्म पर दिए बयान से जुड़ा है, जिसमें ईसाई धर्म को “सच्चा धर्म” बताया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा एक ईसाई पादरी के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही और समन पर रोक लगा दी है। यह मामला उस बयान से जुड़ा है जिसमें पादरी ने कथित रूप से कहा था कि “ईसाई धर्म ही एकमात्र सच्चा धर्म है।”
पादरी के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, जिसके बाद निचली अदालत ने उन्हें समन जारी किया था। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने फिलहाल सभी आपराधिक कार्यवाहियों को स्थगित करने का आदेश दिया और मामले में अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा।
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यह मामला धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और यह धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे में आता है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि ऐसे बयान समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई आगे के लिए तय की है।
यह मामला धार्मिक अभिव्यक्ति, आस्था और कानून के बीच संवेदनशील संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस के रूप में देखा जा रहा है।
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