शिवसेना स्थापना दिवस पर आमने-सामने आए उद्धव और शिंदे, बागी सांसदों को बताया गद्दार
शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर मुंबई में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे ने अलग-अलग रैलियां कीं। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए और शक्ति प्रदर्शन किया।
मुंबई में शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के अवसर पर पार्टी के दोनों गुटों—एकनाथ शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट—ने अलग-अलग रैलियां आयोजित कीं। इस दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक हमले किए और अपनी-अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से कुछ लोग लगातार भौंक रहे हैं, लेकिन उनके सामने एक शेर खड़ा है। उन्होंने कहा कि “कुछ लोग झुंड में भौंकते हैं, लेकिन शेर हमेशा अकेला आता है। यही शिवसेना है। अभी तो यह सिर्फ ट्रेलर है, पूरी फिल्म अभी बाकी है।”
शिंदे ने कहा कि शिवसेना आम लोगों की पार्टी है और इसे महाराष्ट्र के हर गांव और घर तक पहुंचाया गया है। उन्होंने शिवसैनिकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए तालियां बजाने की अपील करते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे भी देश के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना करते। उन्होंने यह भी दावा किया कि महायुति गठबंधन पूरी तरह मजबूत है और आगे भी एकजुट रहेगा।
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दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में बागी सांसदों और विधायकों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को उम्मीद थी कि शिवसैनिक टूट जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए कहा कि पिछले 60 वर्षों में शिवसैनिकों ने जेल तक की यातनाएं झेली हैं।
उद्धव ठाकरे ने उन अटकलों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें शिवसेना के कांग्रेस में विलय की बात कही जा रही थी। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ इतने वर्षों तक रहने के बावजूद शिवसेना का विलय भाजपा में नहीं हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कहीं ऐसा न हो कि भविष्य में भाजपा ही शिंदे गुट में विलय हो जाए।
उन्होंने भाजपा पर शिवसेना के नेताओं को अपने साथ ले जाने का आरोप भी लगाया और कहा कि यदि वे लोगों से नहीं मिलते, तो उनके सहयोगी चुनाव कैसे जीतते।
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