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सेंसेक्स 544 अंक चढ़ा, निफ्टी 24,774 पर बंद; कच्चे तेल में गिरावट और एफआईआई निवेश से बाजार में तेजी

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, एफआईआई निवेश और रुपये की मजबूती से शेयर बाजार में तेजी रही। सेंसेक्स 544 अंक और निफ्टी 390 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ।

घरेलू शेयर बाजार ने सोमवार को मजबूत बढ़त के साथ कारोबार का समापन किया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की दोबारा खरीदारी और रुपये की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। इसके साथ ही निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर भी बनी रही।

बीएसई सेंसेक्स 544.39 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,639.03 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 390.70 अंक यानी 1.60 प्रतिशत की छलांग लगाकर 24,774.30 के स्तर पर बंद हुआ।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंताएं कम हुई हैं, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई, जिसका सकारात्मक असर वैश्विक और भारतीय शेयर बाजारों पर पड़ा।

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उन्होंने बताया कि विदेशी निवेशकों की वापसी और रुपये में मजबूती ने भी बाजार को समर्थन दिया है। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल (यील्ड) का ऊंचे स्तर पर बने रहना उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के लिए चुनौती बना हुआ है।

सेक्टोरल प्रदर्शन में निफ्टी आईटी सबसे आगे रहा और इसमें 2.68 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी 1.72 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 1.55 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 1.48 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 1.41 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.39 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.97 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 0.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं निफ्टी मीडिया तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ नुकसान में रहने वाला प्रमुख सूचकांक रहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि पहली तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजे अब तक अनुमान से बेहतर रहे हैं और स्मॉलकैप कंपनियों का प्रदर्शन लार्जकैप तथा मिडकैप कंपनियों से बेहतर रहा है। अब निवेशकों की नजर आरबीआई की मौद्रिक नीति पर रहेगी। माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन महंगाई, तरलता और भविष्य की नीति को लेकर दिए जाने वाले संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे।

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