एनडीए में शामिल होने पर मंथन तेज, शरद पवार गुट के सामने दो विकल्प; अगले दो हफ्तों में हो सकता है फैसला
शरद पवार गुट की एनसीपी के एनडीए में शामिल होने की अटकलें तेज हैं। पार्टी के भीतर विलय या अलग पहचान के साथ गठबंधन में जाने के दो विकल्पों पर चर्चा जारी है।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने की संभावनाओं पर गंभीर मंथन चल रहा है। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर अगले 8 से 15 दिनों के भीतर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के सामने दो प्रमुख विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। पहला विकल्प यह है कि शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाले दोनों एनसीपी गुटों का विलय कर दिया जाए और एकीकृत पार्टी के रूप में एनडीए में शामिल हुआ जाए। यदि यह संभव नहीं होता है, तो दूसरा विकल्प यह है कि शरद पवार की एनसीपी अपनी अलग पहचान बनाए रखते हुए सीधे एनडीए में शामिल हो या सरकार के भीतर अथवा बाहर से गठबंधन को समर्थन दे।
सूत्रों का दावा है कि शरद पवार गुट के अधिकांश सांसद और विधायक सीधे एनडीए में शामिल होने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि केंद्र और महाराष्ट्र, दोनों सरकारों में भागीदारी से संगठन को मजबूती मिलेगी, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और पार्टी का विस्तार होगा।
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वर्तमान में लोकसभा में शरद पवार गुट के पास 8 सांसद हैं, जबकि अजित पवार गुट के पास केवल 1 सांसद है। शरद पवार गुट का प्रतिनिधित्व सुप्रिया सुले, अमोल रामसिंह कोल्हे, निलेश ज्ञानदेव लांके, बजरंग मनोहर सोनवणे, सुरेश गोपीनाथ म्हात्रे, भास्कर मुरलीधर भगारे, धैर्यशील राजसिंह मोहिते-पाटिल और अमर शरदराव काले करते हैं। वहीं अजित पवार गुट से सुनील दत्तात्रेय तटकरे एकमात्र सांसद हैं।
सूत्रों के अनुसार, अजित पवार गुट में भी संगठनात्मक मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए हैं। सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के बीच नेतृत्व और संगठन को लेकर असहमति की चर्चा है।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा चाहती है कि दोनों एनसीपी गुट एक साथ एनडीए में आएं, ताकि राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर बेहतर समन्वय बना रहे। हालांकि यदि विलय नहीं होता, तब भी शरद पवार की पार्टी अलग पहचान के साथ एनडीए में शामिल हो सकती है। वहीं, यदि यह कदम उठाया जाता है तो सुप्रिया सुले को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका और जयंत पाटिल को महाराष्ट्र में अहम जिम्मेदारी मिलने की भी चर्चा है। हालांकि इन सभी संभावनाओं पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
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