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राजनीतिक नोटबंदी: शशि थरूर ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर जताई चिंता

शशि थरूर ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे “राजनीतिक नोटबंदी” बताते हुए कहा कि इससे देरी और असंतुलित राजनीतिक प्रतिनिधित्व का खतरा है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार के रुख पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि महिला आरक्षण को परिसीमन (डीलिमिटेशन) से जोड़ा गया, तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं और यह देश की संघीय व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

लोकसभा में बोलते हुए शशि थरूर ने कहा कि सरकार जिस तरह जल्दबाजी में परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, वह वैसी ही है जैसी पहले नोटबंदी के समय देखी गई थी। उन्होंने कहा, “यह परिसीमन राजनीतिक नोटबंदी बन जाएगा, इससे देश को नुकसान होगा।”

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना महिलाओं की लंबे समय से चली आ रही मांग को “बंधक बनाने” जैसा है। थरूर ने कहा कि इससे यह संदेश जाएगा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया है, उन्हें राजनीतिक रूप से कम प्रतिनिधित्व मिलेगा, जबकि अधिक जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को अधिक शक्ति दी जाएगी।

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उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने इसे “नारी शक्ति को न्याय का उपहार” बताया है, लेकिन इसे जटिल प्रक्रियाओं से जोड़कर वास्तव में इसे जटिल बना दिया गया है।

शशि थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण एक तैयार नीति है, जिसे तुरंत लागू किया जा सकता है, लेकिन इसे परिसीमन और जनगणना से जोड़ना अनावश्यक देरी पैदा करेगा।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से “डेमोग्राफिक बहुमत की तानाशाही” जैसी स्थिति बन सकती है, जहां कुछ बड़े राज्यों के पास पूरे देश के राजनीतिक फैसलों पर अत्यधिक प्रभाव होगा।

महिला आरक्षण विधेयक, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा जाता है, पर सैद्धांतिक सहमति तो है, लेकिन इसके लागू होने के तरीके को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है।

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