शिवसेना यूबीटी सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा में उठाया दारुखाना ध्वस्तीकरण का मुद्दा, विस्थापित परिवारों को दोबारा बसाने की मांग
शिवसेना यूबीटी सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा में दारुखाना ध्वस्तीकरण का मुद्दा उठाकर विस्थापित परिवारों को दोबारा बसाने की मांग की। उन्होंने नियम 377 के तहत मामला उठाया।
शिवसेना यूबीटी के सांसद अरविंद सावंत ने सोमवार को लोकसभा में मुंबई के दारुखाना इलाके में हुए ध्वस्तीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस कार्रवाई के कारण विस्थापित हुए परिवारों को दोबारा उसी क्षेत्र में बसाने की मांग की। सावंत ने यह मामला लोकसभा में नियम 377 के तहत उठाया।
नियम 377 के तहत सांसद ऐसे जरूरी जनहित के मामलों को सदन में उठा सकते हैं, जिन्हें सामान्य प्रक्रियाओं जैसे प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव या अन्य प्रस्तावों के माध्यम से उठाना संभव नहीं होता। इस प्रावधान के तहत सांसद तत्काल सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को सरकार के संज्ञान में ला सकते हैं।
सावंत ने दारुखाना में ध्वस्तीकरण के बाद प्रभावित परिवारों की स्थिति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को इस कार्रवाई के कारण अपने घर और रहने की जगह से विस्थापित होना पड़ा, उनके पुनर्वास की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। सांसद ने प्रभावित परिवारों को दोबारा बसाने की मांग करते हुए इस मामले में सरकार से हस्तक्षेप की अपील की।
दारुखाना मुंबई का एक महत्वपूर्ण इलाका है और वहां हुए ध्वस्तीकरण से जुड़े मामलों ने स्थानीय निवासियों की चिंताओं को सामने लाया है। प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास और उनके भविष्य को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सावंत ने संसद के माध्यम से इस विषय को केंद्र के सामने रखने की कोशिश की है।
लोकसभा में नियम 377 के तहत मुद्दा उठाए जाने का उद्देश्य ऐसे मामलों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है, जिनका सीधा संबंध आम लोगों की समस्याओं और जनहित से होता है। सांसदों को इस प्रावधान के जरिए अपने क्षेत्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों को सदन के रिकॉर्ड पर रखने का अवसर मिलता है।
सावंत की मांग के बाद अब दारुखाना से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को लेकर सरकार और संबंधित प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।