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शिवसेना-यूबीटी में फिर टूट के संकेत, छह सांसदों की गैरहाजिरी से सियासी संकट गहराया

शिवसेना (यूबीटी) में छह सांसदों की बैठक से गैरहाजिरी के बाद फिर टूट की आशंका बढ़ी। पार्टी ने कारण बताओ नोटिस भेजने और कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) में एक बार फिर विभाजन की आशंका गहराती नजर आ रही है। नई दिल्ली में आयोजित पार्टी की संसदीय दल की बैठक में नौ में से छह लोकसभा सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। पार्टी ने सभी सांसदों को तीन-लाइन व्हिप जारी किया था, इसके बावजूद कई सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए।

इस घटनाक्रम के बाद पार्टी नेतृत्व ने अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस भेजने पर विचार शुरू कर दिया है और चेतावनी दी है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब अटकलें तेज हैं कि ये सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल हो सकते हैं।

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि किसी भी “टूटे हुए गुट” को पार्टी का असली प्रतिनिधि न माना जाए। पार्टी ने यह भी दावा किया है कि सभी विधायक और सांसद एकजुट हैं तथा शिवसेना (यूबीटी) ही असली शिवसेना है।

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पार्टी के अनुसार, लोकसभा में उसके नौ सांसद हैं जबकि शिंदे गुट के पास पांच सांसद हैं। यदि यूबीटी के छह सांसद शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो शिंदे गुट की ताकत बढ़कर 11 सांसदों तक पहुंच सकती है, जो राजनीतिक संतुलन को बदल सकता है।

हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी भी दल से अलग होने वाले सांसदों को दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है।

फिलहाल, पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की चर्चाओं और सांसदों की गैरहाजिरी ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए संकट के संकेत दे दिए हैं। शिंदे गुट ने भी स्थिति पर तंज कसते हुए कहा है कि पार्टी को आत्ममंथन करने की जरूरत है क्योंकि कई नेता संगठन छोड़ रहे हैं।

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