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शिवराज सिंह चौहान ने एक देश, एक चुनाव का किया समर्थन, बोले- बार-बार चुनाव विकास में बाधा

हरिद्वार संत सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक देश, एक चुनाव’ का समर्थन किया। उन्होंने लगातार चुनावों को विकास में बाधा बताते हुए संतों से जागरूकता फैलाने की अपील की।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को हरिद्वार में आयोजित संत सम्मेलन के दौरान ‘एक देश, एक चुनाव’ व्यवस्था का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश में बार-बार होने वाले चुनाव विकास की गति में बाधा बनते हैं और इस संवैधानिक सुधार के समर्थन में जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।

संत सम्मेलन में संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि लगातार चुनाव होने से राजनीतिक दलों और सरकारों का ध्यान बार-बार चुनावी तैयारियों की ओर चला जाता है। इसका असर विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था लागू होने से शासन व्यवस्था को अधिक स्थिरता मिल सकती है।

शिवराज सिंह चौहान ने संत समाज से अपील की कि वह लोगों के बीच ‘एक देश, एक चुनाव’ के विचार को लेकर जागरूकता पैदा करने में सहयोग करे। उन्होंने कहा कि संवैधानिक सुधार से जुड़े इस विषय पर जनता को इसके संभावित लाभों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में चुनाव लोकतंत्र की महत्वपूर्ण प्रक्रिया हैं, लेकिन बार-बार होने वाले चुनावों के कारण संसाधनों और प्रशासनिक क्षमता का बड़ा हिस्सा चुनावी प्रक्रिया में लग जाता है। ऐसे में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। उन्होंने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए और ‘एक देश, एक चुनाव’ के मुद्दे को लेकर समर्थन जताया।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश की प्रगति के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिससे सरकारें लंबे समय तक नीतियों और विकास योजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने संत समुदाय से इस विषय पर लोगों के बीच संवाद और जागरूकता बढ़ाने की अपील की।

‘एक देश, एक चुनाव’ का प्रस्ताव देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने की व्यवस्था से संबंधित है। इसके समर्थकों का तर्क है कि इससे चुनावी खर्च, प्रशासनिक संसाधनों के इस्तेमाल और बार-बार लागू होने वाली चुनावी आचार संहिता के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

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