शोभनदेब चट्टोपाध्याय बने पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष
तृणमूल कांग्रेस ने बालीगंज विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया। पार्टी ने अन्य प्रमुख नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने वरिष्ठ विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया। 82 वर्षीय शोभनदेब चट्टोपाध्याय बालीगंज सीट से विधायक हैं और उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद करीबी सहयोगी माना जाता है।
टीएमसी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि धनियाखली की विधायक असीमा पात्रा और चौरंगी की विधायक नयना बंद्योपाध्याय को उपनेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। वहीं कोलकाता पोर्ट से विधायक और कोलकाता नगर निगम के मेयर फिरहाद हकीम को विधानसभा में मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है। पार्टी ने कहा कि सभी नेता बंगाल की जनता के हित में पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे।
शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने बालीगंज सीट जीतकर लगातार 10वीं बार विधानसभा पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया है। जब 1 जनवरी 1998 को तृणमूल कांग्रेस की स्थापना हुई थी, उस समय वे पार्टी के एकमात्र विधायक थे। उन्होंने पार्टी गठन के तुरंत बाद उपचुनाव जीतकर विधानसभा में टीएमसी का प्रतिनिधित्व किया था।
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हालांकि इस बार उनकी जीत का अंतर थोड़ा कम हुआ, फिर भी कोलकाता की सभी विधानसभा सीटों में यह सबसे बड़ी जीत रही। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार शतरूपा चट्टोपाध्याय को 61,476 मतों से हराया।
विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 294 सदस्यीय सदन में 207 सीटें जीतकर पहली बार राज्य में सरकार बनाई है। टीएमसी को 80 सीटें मिलीं।
मुख्यमंत्री बनने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार बंगाल की “खोई हुई गौरवशाली पहचान” वापस लाने के लिए काम करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में टीएमसी शासन के दौरान राज्य की संस्कृति, कानून व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है।
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