सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण ने भारत की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत किया: दौरे से पहले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर हुए ऐतिहासिक आक्रमण आस्था को कमजोर नहीं कर सके, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत कर मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रेरणा बने।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जनवरी को होने वाले अपने सोमनाथ दौरे से पहले सोमनाथ मंदिर से जुड़ी अपनी पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि ऐतिहासिक आक्रमणों के बावजूद इस पवित्र तीर्थ की आस्था कभी कमजोर नहीं हुई, बल्कि इससे भारत की सांस्कृतिक एकता और मजबूत हुई है। वह 8 से 11 जनवरी तक आयोजित होने वाले सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए सोमनाथ जाएंगे।
The Indian Witness पर साझा किए गए संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुआ पहला आक्रमण और उसके बाद हुए कई हमले लोगों की आध्यात्मिक शक्ति को डिगा नहीं सके। इसके विपरीत, इन घटनाओं ने भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना को और सशक्त किया तथा मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “आज से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ हो रहा है। एक हजार वर्ष पहले, जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास का पहला आक्रमण झेला। इसके बाद हुए अनेक हमले हमारी सनातन आस्था को नहीं हिला सके। उलटे, इनसे भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना और मजबूत हुई तथा सोमनाथ मंदिर का पुनः-पुनः पुनर्निर्माण हुआ।” उन्होंने लोगों से #SomnathSwabhimanParv के साथ अपनी तस्वीरें साझा करने का भी आग्रह किया।
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प्रधानमंत्री ने इस पर्व को स्मरणोत्सव बताते हुए कहा कि यह उन असंख्य भारतवासियों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने कठिन और भयावह समय में भी अपने मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनकी अटूट निष्ठा भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति बनी रही, जो आज भी राष्ट्रीय एकता के लिए प्रेरणा देती है।
पीएम मोदी ने 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में आयोजित उस कार्यक्रम की झलकियां भी साझा कीं, जिसमें मंदिर के 1951 में हुए पुनर्निर्माण और उद्घाटन की 50वीं वर्षगांठ मनाई गई थी। उन्होंने याद दिलाया कि 1951 का ऐतिहासिक समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ था और इसमें सरदार वल्लभभाई पटेल तथा के.एम. मुंशी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान भारत की आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक मूल्यों को उजागर करने वाले अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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