सेना और हिंदू देवताओं पर बयान देने से सोनम वांगचुक का इनकार
सोनम वांगचुक ने सेना और हिंदू देवताओं के खिलाफ बयान देने के आरोपों से इनकार किया। सुप्रीम कोर्ट उनकी NSA हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार को उन आरोपों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने एक साक्षात्कार में यह टिप्पणी की है कि यदि लद्दाख की मांगें पूरी नहीं की गईं तो युद्ध की स्थिति में वहां के लोग भारतीय सेना की मदद नहीं करेंगे। उन्होंने इस बात से भी साफ इनकार किया कि उन्होंने किसी भी हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है।
यह मामला इस समय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जहां सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने उनके राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई हिरासत को चुनौती दी है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने यह दलीलें न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और पी. बी. वराले की पीठ के समक्ष रखीं।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने कहा कि हिरासत आदेश जारी करने वाली प्राधिकरण ने एक डिजिटल प्लेटफॉर्म को दिए गए वांगचुक के कथित साक्षात्कार का हवाला दिया है। उस साक्षात्कार में यह आरोप लगाया गया कि सोनम वांगचुक ने कहा था कि “किसी क्षेत्र को जनमत संग्रह के जरिए जहां जाना हो, जा सकता है” और यह भी कि यदि राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची से जुड़ी मांगें पूरी नहीं हुईं तो युद्ध के समय लद्दाख के लोग भारतीय सेना का सहयोग नहीं करेंगे।
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हालांकि, सोनम वांगचुक ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने न तो कभी भारतीय सेना के खिलाफ कोई बयान दिया और न ही किसी धर्म या देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। उनके अनुसार, उनके विचारों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट अब यह तय करेगा कि वांगचुक की NSA के तहत हिरासत संवैधानिक और कानूनी मानकों पर खरी उतरती है या नहीं।
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