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सोनम वांगचुक लद्दाख को नेपाल-बांग्लादेश जैसा बनाना चाहते थे: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बचाव

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सोनम वांगचुक Gen Z युवाओं को भड़काकर लद्दाख को नेपाल-बांग्लादेश जैसी स्थिति में ले जाना चाहते थे, इसलिए उनकी NSA के तहत हिरासत जरूरी थी।

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की निवारक हिरासत का बचाव करते हुए कहा कि वह जेन-ज़ी (Gen Z) युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे थे और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। सरकार ने यह भी दावा किया कि वांगचुक लद्दाख को नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति में ले जाना चाहते थे।

59 वर्षीय सोनम वांगचुक पिछले साल सितंबर से राजस्थान के जोधपुर स्थित केंद्रीय जेल में बंद हैं। यह हिरासत लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद की गई थी, जिनमें चार लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ—न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले—के समक्ष केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखीं।

तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक अपने भाषणों में सरकार को “वे” कहकर संबोधित करते थे, जो राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत के लिए पर्याप्त आधार है। उन्होंने कहा, “इस देश में ‘हम’ और ‘वे’ जैसा कोई विभाजन नहीं हो सकता। यह हमारी सरकार है।” बार एंड बेंच के हवाले से उन्होंने कहा कि वांगचुक की मंशा लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसी स्थिति में धकेलने की थी।

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मेहता ने आरोप लगाया कि वांगचुक भड़काऊ भाषण दे रहे थे और महात्मा गांधी का नाम केवल एक आवरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक ने अपने भाषणों में ‘अरब स्प्रिंग’ का उल्लेख किया और युवाओं को आत्मदाह जैसे खतरनाक कदमों के लिए उकसाया। उनके अनुसार, अरब देशों में हुई क्रांतियों के दौरान भारी रक्तपात हुआ था और वांगचुक उसी तरह की स्थिति को प्रेरित कर रहे थे।

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि लद्दाख भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र सेना की सप्लाई चेन के लिए अहम है। ऐसे में जनमत संग्रह जैसी मांगें राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हैं। मेहता ने कहा कि यदि यह मामला NSA के तहत हिरासत के योग्य नहीं है, तो फिर कोई भी मामला नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की बात कही थी। इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को फिर से होगी।

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