लंबे अनशन और डिहाइड्रेशन से कमजोर हुए सोनम वांगचुक, सफदरजंग अस्पताल ने लगातार निगरानी की जरूरत बताई
सोनम वांगचुक लंबे उपवास और पानी की कमी के कारण कमजोर हुए हैं। सफदरजंग अस्पताल ने उन्हें स्थिर बताया, लेकिन लगातार निगरानी और उपचार की जरूरत जताई है।
सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ने शनिवार को जानकारी दी कि लंबे समय तक अनशन और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के कारण वह कमजोर हो गए हैं। अस्पताल ने बताया कि फिलहाल उनकी हालत स्थिर है, लेकिन उन्हें लगातार निगरानी और उपचार की आवश्यकता है।
सफदरजंग अस्पताल के बयान के अनुसार, सोनम वांगचुक को सुबह 7:40 बजे आवश्यक चिकित्सा देखभाल के लिए अस्पताल लाया गया था। अस्पताल ने कहा कि लंबे उपवास के कारण उनका शरीर कमजोर हो गया है और शरीर के सामान्य मानकों को बहाल करने के लिए नियमित निगरानी और इलाज जरूरी है।
उनके उपचार के लिए अस्पताल में दो डॉक्टर और दो पैरामेडिकल कर्मचारियों की विशेष तैनाती की गई है। वहीं, दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल की डॉक्टरों और पैरामेडिकल टीम ने भी शनिवार सुबह सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य जांच की थी।
जांच के दौरान डॉक्टरों ने उनकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी थी। हालांकि, बताया गया कि सोनम वांगचुक ने शुरुआत में अस्पताल जाने से इनकार किया। बाद में स्वास्थ्य स्थिति खराब होने और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर दिल्ली पुलिस उन्हें एंबुलेंस से जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लेकर गई।
इस बीच, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे एंगमो ने कहा कि वह सफदरजंग अस्पताल में मौजूद हैं। उन्होंने मांग की कि सोनम को कोई भी दवा या उपचार मौखिक या नसों के माध्यम से देने से पहले उनकी, परिवार की और उन डॉक्टरों की सहमति ली जाए, जो पिछले 20 दिनों से उनकी स्वास्थ्य निगरानी कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि कार्यकर्ता 20 जुलाई को संसद तक मार्च करेंगे।
वहीं, आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने भी सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे छात्रों की मांगों से जुड़े आंदोलन को दबाने का प्रयास बताया।